दो साल में पहली बार वायु गुणवत्ता स्तर 400 पार

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 12:12 AM IST
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कूड़े के ढेर में लगी आग।
कूड़े के ढेर में लगी आग। - फोटो : Rewari

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रेवाड़ी। दो साल में पहली बार अक्तूबर महीने में प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच गया है। इसका सबसे बड़ा कारण सड़कों पर उड़ती धूल व निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी है। नगर परिषद की ओर से करीब 15 दिन पहले तीन रेहड़ी संचालकों के कचरा जलाने पर चालान काटकर खानापूर्ति कर दी गई। लेकिन सड़कों के दोनों ओर जमा मिट्टी को आज तक भी नगर परिषद की ओर से नहीं उठाया गया है। इसके चलते पूरा दिन सड़कों पर धूल उड़ती रहती है। इसके अलावा शहर में अनेक स्थानों पर पाइपलाइन डालने का काम चल रहा है। संबंधित कंपनी की ओर मिट्टी निकालकर बहार छोड़ दी गई। इससे यह मिट्टी उड़कर हवा को प्रदूषित करते हुए सासों में जाकर लोगों को बीमार कर रही है। वीरवार को पीएम10 की मात्रा जहां सामान्य 100 के मुकाबले 418 पर रही। वहीं पीएम 2.5 की मात्रा भी 30 के मुकाबले 139 पर पहुंच गई। जबकि वर्ष 2019 के अक्तूबर माह में महज एक दिन 25 अक्तूबर को पीएम 10 का स्तर 373 और पीएम 2.5 का स्तर 136 रहा था।
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-पीएम 10 और पीएम 2.5 बताता है हवा में धूल के कणों की मात्रा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक हवा में पीएम 2.5 का स्तर 60 मिलीग्राम पर घनमीटर निर्धारित किया है। पीएम 10 का स्तर 100 से अधिक स्वास्थ्य के लिए खराब है, लेकिन जिले की हवा लगातार खराब होती जा रही है। पीएम 10 और पीएम 2.5 का मतलब हवा में धूल के कणों की मात्रा से होता है।
-सांस की बीमारी और आंख में जलन की शिकायत के बढ़े मरीज
प्रदूषण का स्तर बढ़ने के चलते अस्पतालों में भी सांस और आंखों में जलन संबंधी शिकायतों के मरीज बढ़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन सांस की शिकायत संबंधी 50-60 मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं नेत्र ओपीडी में करीब 20 मरीज आ रहे हैं। हालांकि सांस की शिकायत के मरीजों की पहले कोरोना जांच भी कराई जा रही है। चिकित्सकों की ओर से भी सांस व बुजुर्ग लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है।
-बढ़ता प्रदूषण स्तर चिंता का विषय
नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रणबीर सिंह ने बताया कि ओपीडी में प्रत्येक दिन 50 से 60 मरीज सांस की तकलीफ से जुड़े हुए आ रहे हैं। इसका बड़ा कारण बढ़ता प्रदूषण का स्तर है। वहीं कोरोनाकाल में प्रदूषण बढ़ने से संक्रमित मरीजों पर भी असर पड़ रहा है। कोरोना के मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है, वहीं दूसरी ओर सांस के साथ दूषित हवा का जाना चिंता पैदा करने वाला है। इसको लेकर तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।
रामसिंह पुरा में डंपिंग यार्ड में लगी आग भी हवा में घोल रही जहर
एक ओर प्रशासन की ओर से स्वच्छता अभियान चलाया जाता है, वहीं दिल्ली-जयपुर हाईवे पर बनाया गये डंपिंग यार्ड में लगी आग हवा में जहर घोल रही है। दमकल गाड़ी की मदद से प्रत्येक दिन आग को बुझाया जाता है, लेकिन अगले दिन फिर पहले जेसे हालात हो जाते हैं। कचरा जलने पर निकलने वाला धुुंआ हवा में जहर घोलने का काम कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बावल नपा पर जुर्माना भी लगाया जा चुका है, लेकिन हालात में खास सुधार नहीं हो पाए।
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