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पानीपत देश का 11 वें नंबर का सबसे प्रदूषित शहर

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Wed, 17 Jul 2019 01:21 AM IST
पानीपत। फैक्ट्री में से निकलता धुआं।
पानीपत। फैक्ट्री में से निकलता धुआं। - फोटो : panipat
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पानीपत शहर स्वच्छता में देश में जहां 164 वें स्थान पर है, वहीं प्रदूषित शहरों की सूची में पानीपत देश में 11 वें स्थान पर है। प्रदेश में गुरुग्राम के बाद पानीपत सबसे प्रदूषित जिला है। इसलिए एनजीटी ने पानीपत के वायु व जल को स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक नुकसानदायक मानते हुए पानीपत के रेड व ऑरेंज कैटेगरी में आने वाले उद्योगों में मोटा जुर्माना ठोका है। एनजीटी ने इन दोनों कैटेगरी के अंतर्गत आने वाले बड़े उद्योगों पर एक करोड़ रुपये, मध्यम उद्योगों पर 50 लाख व लघु उद्योगों पर 25 लाख रुपये जुर्माना ठोका है। ये जुर्माना वसूलने के लिए एनजीटी ने सीपीसीबी व एचएसपीसीबी को तीन माह का वक्त दिया है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने हाल में देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट जारी की है। शहरों को इस लिस्ट में प्रदेश के दो शहर है। नौवें नंबर पर गुरुग्राम व 11वें स्थान पर पानीपत है। पानीपत में चल रही 20 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां और यहां से हर रोज गुजरने वाले 80 से एक लाख वाहन यहां की वायु को प्रदूषित कर रहे हैं। पानीपत के लगातार बढ़ते प्रदूषण पर एनजीटी ने पिछले दो साल से सख्त रवैया अपनाया है। दो साल में 110 बड़े उद्योगों को बंद करने व 160 से अधिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। बिना अनुमति के भू-जल का दोहन करने वाले 48 उद्योगों को भी हाल में क्लोजर नोटिस जारी किया गया है।
एनजीटी की ओर से उद्योगों से हो रहा प्रदूषण मापने के लिए काम्प्रिहेंसिव इनवायरमेंटल पोल्युशन इंडेक्स (सीईपीआई) तैयार किया गया। इसके तहत हवा, पानी और जमीन पर हो रहे प्रदूषण को अलग-अलग माप कर स्कोर निकाला जाता है, इसमें पानीपत को 83.54 स्कोर मिला है। इनमें वायु को 66 व पानी को 72.75 स्कोर मिला है। गुरुग्राम को 85.15 स्कोर मिला है, जो प्रदेश में सबसे अधिक है। इन दोनों जिलों का स्कोर स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक माना गया है। इन स्कोर के मुताबिक जिस जिले का स्कोर 70 से ज्यादा है, वहां की स्थिति प्रदूषण के हिसाब से अत्यधिक गंभीर है। जबकि 60-70 के बीच स्कोर वाले जिलों की स्थिति को गंभीर माना गया है। इससे कम स्कोर वाले जिलों के हालात सामान्य है।
पानीपत के उद्योगों पर इतना लगाया जुर्माना-
एनजीटी ने पानीपत में लगातार बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए पानीपत के रेड कैटेगरी में आने वाले 370 और ऑरेंज कैटेगरी में आने वाले 222 उद्योगों पर जुर्माना ठोका है। इन दोनों कैटेगरी के बड़े उद्योगों को 1 करोड़ रुपये, मध्यम को 50 लाख छोटे उद्योगों को 25 लाख रुपये एनजीटी में जुर्माने के तौर पर जमा कराने होंगे। पानीपत में ग्रीन कैटेगरी में 25 उद्योग आते हैं, जोकि पर्यावरण के लिए घातक नहीं माने गए हैं।
उद्योगपतियों ने सीएम को पत्र लिखकर जल बोर्ड की मांग की-
एनजीटी भू-जल से बिना अनुमति के दोहन करने वाले उद्योगों पर लगातार कार्रवाई के निर्देश दे रही है। पानीपत में मात्र 14 औद्योगिक इकाइयों के पास ही भू-जल का दोहन करने की अनुमति है। राज्य भू-जल प्राधिकरण न होने के कारण यहां के उद्योगपतियों को एनओसी लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए एक्सपोर्टर एसोसिएशन के प्रधान ललित गोयल ने सीएम को पत्र लिखकर राज्य भू-जल प्राधिकरण के गठन की मांग की है।
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