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जिले का वास्तविक लिंगानुपात क्या, नहीं है किसी के पास जवाब

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Wed, 10 Jul 2019 10:42 PM IST
पानीपत। सिविल अस्पताल ।
पानीपत। सिविल अस्पताल । - फोटो : panipat
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान पर प्रशासन सही प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है। सरकार को जिले के लिंगानुपात की जो रिपोर्ट भेजी जा रही है, उसमें भी फर्जीवाड़े का संशय बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग लिंगानुपात में भारी भरकम बढ़ोतरी दिखा रहा है वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग लिंगानुपात में भारी गिरावट दिखा रहा है। इसी कारण पानीपत के लिंगानुपात की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। प्रदेश सरकार हर जगह पानीपत की रिपोर्ट प्रस्तुत कर वाहवाही लूट रही है, जबकि ग्राउंड रिपोर्ट इससे बिल्कुल अलग है।
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दोनों विभागों में तालमेल की कमी : लिंगानुपात पर स्वास्थ्य विभाग व महिला बाल कल्याण विभाग बिना तालमेल के कार्य कर रहे हैं। दोनों के लिंगानुपात पर अपने-अपने आंकड़े हैं। दोनों में काफी अंतर है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग छह माह में लिंगानुपात में 28 अंक की गिरावट दिखा रहा तो स्वास्थ्य विभाग 30 अंक की बढ़ोतरी। दोनों विभागों में कोई तालमेल नहीं है। दोनों कभी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान पर मीटिंग भी नहीं करते। इस कारण लिंगानुपात की वास्तविक स्थिति भी सामने नहीं आ पा रही। विभाग के पास योजना के लिए भारी भरकम बजट है लेकिन विभागों में तालमेल की कमी से वह बजट भी सही जगह खर्च नहीं हो पा रहा।
डैशबोर्ड तक को अपडेट नहीं किया : योजना पर सही परिणाम लाने के लिए सबसे पहले दोनों विभागों के आंकड़ों का मिलान होना जरूरी है। अगर दोनों विभाग हर महीने एक बैठक करके गांव अनुसार एक-दूसरे की रिपोर्ट का मिलान करें और देखें कि कौन से विभाग का डाटा कहां मैच नहीं हो रहा और उसकी जांच करके फिर एक कंपाइल लिंगानुपात रिपोर्ट बनाई जाए तो योजना पर काम हो सकता है। इसको लेकर दो साल पहले प्रयास भी हुए थे। तब तत्कालीन सीएम सुशासन सहयोगी ने एनआईसी के साथ मिलकर एक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाया था। उसमें दोनों विभागों को हर महीने अपना डाटा अपडेट करना था जिससे उसका मिलान हो सके। ऐसा करने वाला पानीपत प्रदेश में पहला जिला था। लेकिन कुछ माह अपडेट करके दोनों ही विभागों ने डैशबोर्ड पर डाटा अपडेट नहीं किया।
एएनएम व आंगनबाड़ी वर्करों में तालमेल की कमी : योजना में बेटी बचाने को इन दोनों विभागों को मिलकर काम करना होता है। लेकिन दोनों विभागों में नीचे से लेकर ऊपर तक कहीं तालमेल नहीं। गर्भवती महिला को शुरू से ट्रैक करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम, जीएनएम पर होती है तो महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से यह जिम्मेदारी क्षेत्र की आंगनबाड़ी वर्करों पर होती हैं। इन्हें मिलकर अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को रजिस्टर करके डिलीवरी और उसके बाद तक ट्रैक करना होता है, लेकिन देखने में ये आ रहा है कि एएनएम और आंगनबाड़ी वर्करों में तालमेल नहीं है। स्वास्थ्य विभाग केवल उन बच्चों का डाटा रखता है जिनकी अस्पतालों में डिलीवरी होती है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग केवल उनका डाटा रखता है जो गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी में रजिस्ट्रेशन करवाती हैं।
क्या कहते हैं दोनों विभाग के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग : इनके अनुसार दिसंबर 2018 तक ओवरऑल लिंगानुपात 900 था। 6 माह बाद जून 2019 तक यह 30 स्थान बढ़कर 930 हो गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग: इनके अनुसार दिसंबर 2018 तक ओवरऑल लिंगानुपात 923 था। 6 माह बाद जून 2019 तक यह 28 स्थान गिरकर केवल 895 रह गया है।
2015 के बाद जिले का लिंगानुपात : 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का आगाज किया था। उस समय पानीपत का लिंगानुपात 837 था। वर्ष 2020 तक देश का लिंगानुपात शत-प्रतिशत करना अभियान का मुख्य उद्देश्य था। अभियान के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2015 से 2017 के अंत तक लिंगानुपात 108 अंकों की बढ़त लेते हुए 945 अंक तक संतोषजनक स्थिति में पहुंच गया। इतना ही नहीं, पानीपत को प्रदेश का अव्वल जिला होने का तमगा भी मिला। जनवरी 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक लिंगानुपात गिरकर 848 तक पहुंच गया है। इस गिरावट के लिए जिले के संबंधित अधिकारियों को अपने उच्चाधिकारियों की फटकार भी सुननी पड़ रही है। अब विभाग के अनुसार जून 2019 में लिंगानुपात में बढ़ोतरी हुई है और अब लिंगानुपात 930 तक पहुंच गया है।
दोनों विभाग की रिपोर्ट में अंतर होना स्वाभाविक है, क्योंकि हमारा डाटा नगर निगम से है। उनका डाटा केवल आंगनबाड़ी केंद्र से है। हमें हेल्थ सेंटर पर डिलीवरी के अनुसार आंकड़ा तैयार करते हैं। हमारा आंकड़ा वास्तविक है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लिंगानुपात पर कार्य भी कर रहा है।
डॉ. मुनीष गोयल, नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ
स्वास्थ्य विभाग डिलीवरी के हिसाब से आंकड़े तैयार करता है। हम लिंगानुपात की रिपोर्ट आंगनबाड़ी में रजिस्ट्रेशन के हिसाब से करते हैं। हमारा और स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में तो लगभग सही है, लेकिन शहर में कई क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। इसलिए शहरी क्षेत्र में थोड़ी गड़बड़ सामने आ रही है। इसलिए हमारे व स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अंतर है।
सरला यादव, महिला एवं बाल विकास अधिकारी पानीपत।
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