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एन्वायरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल एथौरिटी ने तंदूर पर भी लगाया प्रतिबंध, लोगों को रहना पड़ेगा तंदूरी रोटी से वंचित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 17 Oct 2019 01:48 AM IST
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त्योहारी सीजन में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ईपीसीए (एंवायरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी) ने सख्त रवैया अपना लिया है। अब दिल्ली-एनसीआर के शहरों में 15 अक्टूबर से डीजल से चलने वाले जेनरेटर और इसके साथ ही रेस्त्रां व होटलों में चलने वाले तंदूरों में लकड़ी व कोयला जलाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। जल्द ही विभाग इस संबंध में सार्वजनिक रूप से नोटिस जारी कर लोगों को सूचित करेगा। इसका उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
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दरअसल, 15 अक्टूबर से एनसीआर के शहरों में ग्रैप सिस्टम लागू हो रहा है। आशंका जताई जा रही है कि 10 नवंबर से दिल्ली-एनसीआर की हवा बेहद खराब स्तर तक पहुंच सकती है। जिसके चलते एनसीआर में अब होटल और ढाबों में लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल नहीं होगा। साथ ही शहर में डीजल से चलने वाले जनरेटरों पर भी रोक लगाई जाएगी। ईपीसीए ने ग्रैप के मद्देनजर साफ कहा है कि इस बार भी एनसीआर को इस नियम से छूट नहीं दी जा सकती। इस वर्ष सिर्फ शहरों पर ये रोक लगाई गई है। इमरजेंसी सर्विसेज में इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
निर्देश का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई
इस बाबत पानीपत नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण पर रोकथाम लगाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। जिले में संचालित होटल और ढाबों में जलने वाले तंदूरों पर पहले ही रोक लगा दी गई है। वहीं अब डीजल जनरेटर पर भी 15 अक्टूबर से रोक लगाने के निर्देश ईपीसीए द्वारा किए गए हैं। इस वर्ष सर्दियों से पहले एहतियातन सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदूषण निंयत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसारदिवाली से पहले कुछ सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। ग्रैप सिस्टम को सख्ती से लागू कराया जाएगा।
प्रदूषण हुआ तो अधिकारी होंगे जिम्मेदार
ईपीसीए के चेयरमैन डॉ. भूरे लाल ने मीटिंग में साफ किया है कि इस बार खतरनाक प्रदूषण हुआ तो अफसर जिम्मेदार होंगे। उन्होंने अधिकारियों को सख्ती से ग्रैप लागू करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों को साफ तौर पर निर्देश दिए है जहां से भी डीजल के जनरेटर चलने व तंदूर जलने की शिकायत आती है। वहां कार्रवाई होनी चाहिए, अगर प्रदूषण हुआ तो उसके जिम्मेदार अधिकारी होंगे।
शादी-पार्टी वालों की बढ़ेगी परेशानी
15 अक्टूबर से लागू हो रहे ग्रैप सिस्टम के बाद डीजल डीजी सिस्टम पर लग रही रोक से शादी पार्टी वालों की परेशानी बढ़ सकती है। कारण, देव उठनी एकादशी 8 नवंबर को है और इसी दिन से शादियां शुरू हो रही हैं। इस दौरान कार्यक्रम में बिजली चले जाने पर जनरेटर न होने पर लोगों को दिक्कत हो सकती है। साथ ही मेहमान तंदूर में बनने वाले खाने का लुत्फ भी नहीं उठा सकेंगे।
यह होंगी एक्टिविटी
1. सड़क निर्माण, स्ट्रॉम वाटर, ड्रेनेज और सीवरेज लाईन निर्माण में पर्यावरण नियमों का पालन करवाना।
2. रबड़ प्लास्टिक और कपड़ा आदि कचरे को जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।
3. कचरा जलाने और बायोमास जलाने वालों को रोकने के लिए टीमों का गठन करना।
4. ठोस कचरा ले जाने वाले वाहनों को पर्याप्त रूप से कवर करवाना।
5. रात के समय में नियमों की अवहेलना पर अंकुश लगाना।
6. नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाने विभिन्न स्थानों पर पड़े कचरे और मलबे को उठाने की एक्टिविटी कराई जाएगी।
7. सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर अंकुश लगाना।
8. निर्माण गतिविधियों को रोकने और पार्किंग फीस बढ़ाने भी गतिविधियों में शामिल है।
इंडस्ट्रीज और कंस्ट्रक्शन पर रहेगी नजर-
प्रशासन की नजर शहर के उद्योगों और कंस्ट्रक्शन पर भी रहेगी इसकी जिम्मेदारी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई है। बोर्ड लगातार फैक्ट्रियों में छापेमारी करेगा और कंस्ट्रक्शन कार्य पर भी नजर रखेगा।
पानीपत देश का 11 वे नंबर का सबसे प्रदूषित शहर
एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार पानीपत प्रदेश का दूसरा व देश का 11 वे नंबर का सबसे प्रदूषित शहर है। पानीपत में अवैध रूप से 5 हजार से अधिक फैक्टरियां चल रही है। हर रोज यहां से 80 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। डाई हाउस में चप्पल व जूते जलाए जाते हैं।
धूल पर भी दिया जाएगा ध्यान
प्रशासन इस बात पर भी ध्यान देगा कि धूल के कारण पर्यावरण प्रदूषित ना हो। धूल के कण वायू में ना मिले। इसके लिए जिन स्थानों पर धूल उड़ती है। उनको भी चिह्नित किया जाएगा वहां पर पानी का छिड़काव कर उसे पक्का करने की योजना है। ये अधिकतर वो जगह है जहां से वाहन गुजरते हैं।
हम सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं- विनोद
सरकार का फैसला सराहनीय है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ऐसे कदम उठाना अब मजबूरी हो गई है। सरकार उद्योगों को अच्छी बिजली दे रही है इसलिए इसका उद्योगों पर नाममात्र ही फर्क पड़ेगा। सरकार का कदम सराहनीय है। हम इसका स्वागत करते हैं।
विनोद खंडेलवाल, प्रधान चैंबर ऑफ कॉमर्स
धागा मिल पर पड़ेगा बुरा असर-राणा
सरकार के इस फैसले का धागा मिल पर बड़ा असर पड़ेगा। उत्पादन प्रभावित होगा। तंदूर चलाने वाले मजदूर बेरोजगार होंगे। सरकार को वाहनों पर लगाम लगानी चाहिए। चाइना की तर्ज पर इलैक्ट्रिक वाहन लाने चाहिए। तब जाकर प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। सरकार को फैसले पर पुर्न विचार करना चाहिए।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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