बीबीए और बीसीए से मोहभंग

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Panipat Published by: Updated Wed, 10 Jul 2013 05:32 AM IST

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पानीपत। औद्योगिक नगरी के युवाओं का बीबीए और बीसीए जैसे कोर्स से मोह भंग होता जा रहा है। युवा बीबीए के बजाय बीकॉम और बीसीए के बजाय बीएससी को तव्वजो दे रहे हैं। इन कोर्स में दाखिले का अनुपात साल दर साल घटता जा रहा है। शहर के तीनों एडेड समेत जिले के लगभग सभी कॉलेजों में बीबीए और बीसीए कोर्स हैं। इस समय नए सत्र के दाखिलों का काम जोरशोर से चल रहा है। कॉलेजों में बीबीए और बीसीए के बजाय बीकॉम तथा बीएससी में युवा दाखिला लेना पसंद कर रहे हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंतर्गत ट्रेडिशनल कॉलेजों में प्रोफेशनल कॉलेजों के पेरलल बीबीए व बीसीए कोर्स 1998-99 से शुरू किए गए थे। ये स्नात्तक के प्रोफेशनल कोर्स होते हैं।
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कहां जाते हैं बीसीए और बीबीए के बाद
बीबीए और बीसीए कोर्स को प्री एमबीए तथा एमसीए कोर्स भी कहा जाता है। बीबीए करने वाले युवा एमबीए और बीसीए करने वाले एमसीए करते हैं। इसके बाद युवा इंडस्ट्री में जॉब के मौके तलाशने निकल जाते हैं और इसमें बेहतर अवसर मिल जाते हैं।

मोह भंग का कारण
शिक्षाविदें की मानें तो बीसीए और बीबीए में युवाओं का मोह भंग होने के एक नहीं कई कारण हैं। उनका मानना है कि बीसीए और बीबीए के बाद युवा वर्ग एमबीए तथा एमसीए में जाते हैं। एमबीए और एमसीए करने के बाद युवाओं को इंडस्ट्री में अपेक्षा के अनुसार नौकरी और वेतन नहीं मिल पा रहा है। इसका दूसरा कारण बीसीए और बीबीए का पाठ्यक्रम इंडस्ट्री की डिमांड अनुसार नहीं है। इन कोर्सों को करने के बाद युवाओं को नौकरी करने के लिए इंडस्ट्री के अनुसार ट्रेनिंग या छोटे कोर्स करने पड़ते हैं। तीसरा बड़ा कारण इन कोर्सों का सेल्फ फाइनेंस के तहत चालू करना होना है। सेल्फ फाइनेंस में युवाओं को फीस अधिक देनी पड़ती है।
यह कहते हैं युवा
बीबीए और बीसीए के बजाय युवा वर्ग बीकॉम और बीएससी करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अंकित कुमार ने बताया कि वह बीसीए करना चाहता था लेकिन बाहर का माहौल देखने के बाद उसने अपनी योजना टाल दी। उसने बीसीए के बजाय बीएससी में दाखिला लिया है। रितु ने बताया कि बीबीए करने के बाद नौकरी के मौके बहुत कम हैं। इसकी अपेक्षा बीकॉम करने के बाद किसी भी इंडस्ट्री में नौकरी आसानी से मिल जाती है।

वर्जन
बीबीए और बीसीए को लेकर युवाओं में उदासीनता है लेकिन कॉलेजों में सीटें हर वर्ष पूरी हो जाती हैं। इन कोर्स में युवाओं को नौकरी के बेहतर मौके मिल सकते हैं। उनको लगातार इन कोर्सों को अपनाना चाहिए।
डॉ. अनुपम अरोड़ा, प्राचार्य, एसडी पीजी कॉलेज
वर्जन
इन कोर्सों में इस बार अन्य वर्षों की अपेक्षाकृत कुछ कम आवेदन आए हैं।
डॉ. जगदीश गुप्ता, प्राचार्य, आर्य पीजी कॉलेज
वर्जन
कॉलेज में बीबीए और बीसीए में अन्य वर्षों की अपेक्षा भीड़ कम है। युवा अन्य कोर्स में दाखिला ले रहे हैं। युवाओं को इन कोर्सों को भी अपनाना चाहिए।
रेनू शर्मा, प्राचार्या, आईबी पीजी कॉलेज ।

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