कर्तव्य निभाकर पाएं अधिकार

Panipat Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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पानीपत। आज गणतंत्र दिवस है, यानी राष्ट्र भावना को जागृत करने का दिन। आज तिरंगे के नीचे अपने अधिकारों को पाने के साथ-साथ कर्तव्यों को निभाने की भी शपथ लेें। जनप्रतिनिधि इस दिन फिर भाषण देंगे और लोगों से विकास कार्यों में सहयोग की अपील होगी। जिले में दर्जनों ऐसी घोषणाएं और समस्याएं हैं, जिनका आज समाधान की जरूरत है।
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26 जनवरी का महत्व
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 26 जनवरी 1929 को रावी के तट पर स्वराज्य की घोषणा की। लोगों ने इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाना शुरू किया। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हो गया। देशवासी 26 जनवरी को भी इतिहास में यादगार मनाना चाहते थे। इस दिन के महत्व को देखते हुए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया और इसे गणतंत्र के रूप में मनाने लगे।


कहां हैं हम
पानीपत एक नवंबर 1989 को करनाल से अलग जिला बना था। बाद में दो जुलाई 1991 को वापस करनाल जिले में शामिल कर दिया। लोगाें के विरोध के बाद एक जनवरी 1992 को पानीपत अलग से जिला घोषित कर दिया। पानीपत में दो सब डिवीजन और चार विधानसभा क्षेत्र हैं। यह दिल्ली से उत्तर में 90 किलोमीटर की दूरी पर है। जिले में 6,50,324 पुरुष, 5,50, 860 महिलाएं हैं। जिले की साक्षरता दर 77.5 प्रतिशत और लिंगानुपात 1000:860 है। यहां पर इंडियन ऑयल रिफाइनरी, नैफ्था क्रैकर प्लांट, एनएफएल और थर्मल की तीन बड़ी इकाइयां हैं। इसके अलावा यहां का हैंडलूम, बेडशीट, कंबल और कारपेट विश्व प्रसिद्ध है।
हाली झील को पानी की दरकार
उर्दू के प्रसिद्ध शायर अल्ताफ हुसैन हाली के नाम पर बनी झील सालाें से सूखी है। बीते वर्ष तत्कालीन डीसी जेएस अहलावत ने झील में नहर का पानी लाने की योजना बनाई। इसी उद्देश्य से असंध रोड नाले की सफाई भी कराई, लेकिन हाली झील तक पानी नहीं पहुंचा। झील में ट्यूबवेल से पानी भरने की योजना भी कारगर नहीं हो पाई। हाली झील में किश्ती चलने की बजाय गंदगी पड़ी है।
म्यूजियम में रणबांकुरों को चाहिए सहारा
जीटी पर एलिवेटेड हाईवे बनाते समय हटाए गए पानीपत की तीनों लड़ाइयों के रणबांकुरों के बूत ईंट और पत्थरों के सहारे खड़े हैं। बिंझौल नहर स्थित म्यूजियम में बुतों के रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं है। म्यूजियम देखने वाले दर्शकों को भी इनकी दशा देखकर शर्मिंदगी महसूस होती है, लेकिन प्रशासन और विभाग का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
नाले को भी चाहिए ग्रांट
ड्रेन नंबर एक को पक्का करने की 2006 में घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शहरवासियों को नाले की गंदगी से राहत मिलने की उम्मीद नजर आई। इसके बाद जिला प्रशासन और नगर निगम ने योजना बनाई और बजट भी मंजूर करा लिया, लेकिन नाले का प्रस्ताव नगर निगम, सिंचाई विभाग और हुडा के दांवपेच में फंस गया। नाले पर न तो सड़क बन पाई और न ही बाजार बन पाया। लोगों को हर सीजन में नाले की बदबू से परेशानी उठानी पड़ रही है।
यातायात के पुख्ता इंतजाम नहीं
औद्योगिक नगरी में एलिवेटेड हाईवे बनने के बाद भी यातायात एक समस्या है। करोड़ों रुपये एलिवेटेड हाईवे पर खर्च करने के बाद भी जीटी रोड पर हर समय जाम जैसी स्थिति बनी है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने यहां के प्रमुख कटों को बंद कर दिया, बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हुआ। अधिकारी कट खोलने को राजी नहीं हैं। जिला ही नहीं यहां से गुजरने वाले वाहन चालक भी जाम से परेशान हैं।

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