लापरवाह अधिकारी से आमदनी पर असर

Panipat Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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पानीपत। नगर निगम अधिकारी और कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा नगर निगम पर भर पड़ रहा है। शहर में दुकान और मकान कहने को तो नगर निगम के दायरे में आते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर मकान और दुकानों का ब्योरा निगम के हाउस टैक्स रिकार्ड में ही नहीं है। इससे नगर निगम की आमदनी पर अच्छा खासा असर पड़ रहा है। इसकी वजह से हाउस टैक्स के रूप में नगर निगम को चार करोड़ के निर्धारित लक्ष्य में से मात्र 88 लाख रुपये ही मिल पाया है। इससे एक ओर जहां नगर निगम को भारी नुकसान हुआ, वहीं इसका असर शहर के विकास कार्यों पर भी पड़ा।
लोग भी भुगत रहे हर्जाना
नगर निगम की अनदेखी का हर्जाना निगम के साथ-साथ मकान मालिकों को भी भुगतना पड़ रहा है। ढाई साल पहले शहर को नगर निगम का दर्जा मिला। इसमें बाहरी कालोनियों को भी शामिल किया गया था। इन कालोनियों में कुछ ऐसे मकान और दुकान हैं जिनका ब्योरा निगम के रिकार्ड में नहीं चढ़ पाया। इस समय नगर निगम के दायरे में आने वाली छह करोड़ की आबादी में मकान और दुकानों की संख्या सिर्फ 60 हजार है।

नियमित नहीं हो रहा सर्वे
मकान और दुकानाें का नगर निगम के दायरे में न आने के कारण अधिकारी हाउस टैक्स कर्मचारियों की कमी और समय पर सप्लीमेंट सर्वे का न होना बता रहे हैं। इस कारण मकान और दुकानों को नंबर नहीं दिए जा सके। शहर में ऐसे मकान और दुकानों की संख्या हजारों में हैं, जिनसे नगर निगम की ओर से मिलने वाली सुविधाओं के बदले टैक्स नहीं वसूला जा सका। दूसरी ओर मकान मालिकों को भी नगर निगम से मकान नंबर न मिलने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग न तो अपने मकानों को बेच पा रहे हैं और न ही अन्य मकानों को खरीद पा रहे हैं। नगर निगम के रिकार्ड में जुड़ने के बाद ही इन मकानों को नंबर मिलने की संभावना है।

विकास कार्यों को झटका
निर्धारित हाउस टैक्स राशि न वसूल पाने के कारण नगर निगम के विकास कार्यों को झटका लगा है। हाउस टैक्स की राशि को शहर में साफ सफाई, बिजली आपूर्ति और पार्कों के रख रखाव आदि पर खर्च की जाती है। राशि न होने के कारण सार्वजनिक स्थलों की नियमित रूप से देखभाल नहीं हो पा रही है।

देरी से शुरू हुआ सर्वे
नगर निगम साल भर हाउस टैक्स सर्वे की योजना ही बनाता रहा। इसका खमियाजा हाउस टैक्स के टारगेट से पिछड़कर देना पड़ रहा है। अधिकारी इसकी वजह स्टाफ की कमी बता रहे हैं।

‘शहर में समय पर सप्लीमेंट सर्वे न होने के कारण इन मकानों को नंबर नहीं दिया जा सका। सर्वे कराया जा रहा है, जिन मकान या दुकानों को नंबर नहीं मिले थे, अब मिल जाएंगे।
- महेंद्र शर्मा, सचिव, नगर निगम पानीपत

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