इनेलो जिलाध्यक्ष समेत 26 हत्या का दोषी करार

Panipat Updated Sun, 23 Dec 2012 05:31 AM IST
पानीपत। इनेलो के जिलाध्यक्ष (ग्रामीण) शुगन चंद समेत 26 आरोपियों को जिला अदालत ने हत्या और मारपीट के मामले में दोषी करार दिया है। एडीजी वाणी गोपाल शर्मा की अदालत ने इस मामले में एक आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया है। आरोपियों में तीन पिता-पुत्र भी शामिल हैं। कोर्ट सोमवार को दोषियों को सजा सुनाएगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद गांव व राजनीति में हलचल पैदा हो गई है।
मामला थाना मतलौडा के अंतर्गत गांव शेरा में दो अप्रैल 2009 का है। गांव के दो पक्षों में रंजिशन खूनी झगड़ा हो गया। इसमें एक पक्ष के नफेसिंह समेत 11 लोग घायल हो गए थे। इनमें नफे सिंह की पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने दूसरे पक्ष के इनेलो जिलाध्यक्ष शुगन चंद समेत 27 लोगों पर हत्या और मारपीट का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
एडीजी वाणी गोपाल शर्मा ने इस मामले में शनिवार को इनेलो जिलाध्यक्ष शुगन चंद, राजू, आजाद, लख्मी, राष्ट्रपाल, धर्मबीर, कर्मबीर, भूपेंद्र, वीरेंद्र, मनबीर, लाभसिंह उर्फ लवली, जिलेसिंह, रामकुवार, रघबीर, दरिया, हवासिंह, सेवा सिंह, भीम सिंह, सुशील, सुरेंद्र, सुलेंद्र, विनोद, विक्की, संजय, सुभाष और काला को दोषी करार दे दिया और एक अन्य आरोपी सुक्रमपाल को भगोड़ा घोषित कर दिया। कोर्ट सभी आरोपियों को सोमवार 24 दिसंबर को सजा सुनाएगी। कोर्ट ने इसके साथ पुलिस को भगोड़े सुक्रमपाल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं।

ये था मामला
जिले के गांव शेरा में दो अप्रैल 2009 को सब कुछ सामान्य था। आरोप थे कि मांगेराम अपने परिवार समेत खेत से ट्रैक्टर-ट्राली में आ रहा था। गांव के बाहर आरोपी पक्ष के लोगों को घेर लिया और लाठी-गंडासी से हमला कर दिया। इस हमले में एक पक्ष के मांगेराम, जेलदार, जसमेर, बीरबल, अमित, चतर सिंह, नफेसिंह, उषा देवी, लछमी देवी, जयपाल व कर्म सिंह घायल हो गए थे। नफेसिंह को गंभीरावस्था में पीजीआई रोहतक भरती कराया गया था। जहां पर नौ दिन बाद उसकी मौत हो गई।

बच्चों की लड़ाई में बड़ों को सजा
मतलौडा खंड के गांव शेरा में 25 अगस्त 2008 को दो परिवारों के बच्चों में कहासुनी हो गई। दोनों बच्चों की कहासुनी बड़ों की लड़ाई में बदल गई। एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष की पिटाई कर दी। पीड़ित पक्ष ने दूसरे पक्ष के राजसिंह को पिटाई कर दी। इसी बात को लेकर दोनों परिवारों में रंजिश बढ़ गई। अप्रैल 2009 में आरोपी पक्ष ने पीड़ित पक्ष के लोगों की गांव के बाहर घेरकर बुरी तरह से पिटाई कर दी। दोनों परिवारों के बच्चों की लड़ाई का खामियाजा बड़ों को भुगतना पड़ा।

फैसला आने के बाद कार्रवाई
बचाव पक्ष के वकील शेर सिंह खर्ब ने बताया कि इस मामले में राजू, आजाद, मनबीर व लाभसिंह मुख्य आरोपी हैं। इनेलो नेता शुगन चंद रोड़ मुख्य आरोपी नहीं हैं। उन पर आईपीसी की धारा 323 लगी हुई है। सोमवार को एडीजी की कोर्ट के फैसले के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।

न्याय के लिए लगाई थी गुहार
पीड़ित पक्ष के शमशेर सिंह ने बताया कि 2009 में झगड़े और फिर नफेसिंह की मौत के बाद पुलिस कार्रवाई करने को तैयार नहीं थी। वे आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर तत्कालीन एसएसपी व आईजी से मिले थे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

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