बैंक रहे बंद, उद्यमी परेशान

Panipat Updated Fri, 21 Dec 2012 05:32 AM IST
पानीपत। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज और आफिसर एसोसिएशन के आह्वान पर बैंकों की हड़ताल के चलते औद्योगिक नगरी का लेन देन ठप रहा। उद्यमियों से लेकर अन्य उपभोक्ताआें को लेन देन के लिए बैंकों के चक्कर काटने पड़े। मगर अचानक हुई हड़ताल के चलते उनको मायूसी ही हाथ लगी। हड़ताल के चलते जिले की करीब 150 बैंक शाखाएं बंद रहीं और करीब 300 करोड़ का लेन-देन प्रभावित रहा।

बैंक अधिकारी और कर्मचारी जीटी रोड स्थित केनरा बैंक के बाहर एकजुट हुए और सरकार की अनदेखी पर रोष जताया। यूनियन बैंक स्टाफ यूनियन के क्षेत्रीय महासचिव और हरियाणा बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के संयुक्त सचिव सीके अग्रवाल और जिला प्रधान डीआर तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार नए बैंक लॉ को पास कर अधिकारियों व कर्मचारियों की मांगों को अनदेखा कर रही है। उन्होंने कहा कि नए नियम बैंक, अधिकारियों व कर्मचारियों के हक में नहीं हैं और नेशनल बैंकों पर इसका सीधा विपरित असर पड़ेगा। इस मौके पर पीके गर्ग, अविनाश बजाज, आरसी ढींगड़ा और एनएल चावला, एमके गोयल, एनएल चावला, याकीन, विनीत, केके गोसाई, नंदलाल, सुभाष और प्रेम तोमर मौजूद रहे।

नए लॉ का ये होगा असर
नया बैंक लॉ आने के बाद बैंकों का सोशल स्ट्रक्चर खत्म हो जाएगा। सरफेसिया एक्ट सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्टक्शन ऑफ बैंक (एफेक्स एक्ट) के तहत लोन संबंधित लॉ में बदलाव किया है। इससे पहले बैंक का लोन वापस न करने पर संबंधित व्यक्ति या फर्म की प्रापर्टी को जब्त करने का नियम था। नए लॉ के बाद कंपनी किसी उपभोक्ता के कर्ज न चुकाने की स्थिति में सिक्योरिटी जब्त नहीं करेगी। बैंक इसके विपरीत कंपनी या फर्म के शेयर खरीदेगा। इस नियम के बाद बैंक अपना फंसा हुआ पैसा निकालने की बजाय और लगाना पड़ेगा। नए लॉ में नेशनल बैंकों के डगमगाने पर सुधार करने की बजाय प्राइवेट हाथों में सौंपा जाएगा।

शुक्रवार को भी पड़ेगा असर
बैंक बृहस्पतिवार को बंद रहे और पूरा दिन कोई लेन-देन नहीं हो सका। इसका असर शुक्रवार को बैंकों में देखने को मिलेगा। शनिवार को बैंकों का वर्किंग डे हाफ होने पर सभी उपभोक्ता शुक्रवार को काम निपटाने का प्रयास करेंगे। जिसके चलते बैंकों में सामान्य दिनों की अपेक्षा दोगुना से अधिक भीड़ रहेगी। बैंक अधिकारियों को उपभोक्ताओं की सुविधा को देखते हुए अतिरिक्त प्रबंध करने पड़ेंगे। किसी बैंक में अतिरिक्त प्रबंध करने की अनदेखी बरतने पर दिक्कत हो सकती है।

यहां के बैंकों का महत्व
पानीपत विश्व पटल पर एक्सपोर्ट नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां पर छोटी बड़ी करीब 10,400 औद्योगिक इकाइयों है। करीब ढ़ाई लाख श्रमिक हैं। यहां से सालाना 42 सौ करोड़ रूपये का एक्सपोर्ट व 25 हजार करोड़ का सालाना घरेलू बाजार है। एक दिन में बैंक की हड़ताल होने से यहां के बाजार से लेकर उद्योग प्रभावित होते हैं। खासकर धागे समेत अन्य कच्चे माल की खरीद फरोख्त उधार होती है। ऐसे में अगर एक दिन भी बैंक बंद हो जाते हैं करोड़ों का लेनदेन प्रभावित हो जाता है।

उपभोक्ताओं ने झेली परेशानी
बैंकों की हड़ताल का रातोंरात फैसला लेने पर उपभोक्ताओं को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ी। उपभोक्ता तहसील कैंप निवासी ईश्वर सिंह और अर्जुन, शांति नगर निवासी मेहर सिंह और नरेंद्र, कच्चा कैंप निवासी लक्ष्मी देवी ने बताया कि वे बैंक से पैसे निकालने आए थे, लेकिन बैंक हड़ताल के चलते बंद मिले। राजनगर निवासी वृद्धा बीरो देवी ने बताया कि उसके लड़के ने मुंबई से पैसा भेजा था जिसे निकलवाने के लिए वह सुबह सवेरे काम निपटाकर रिक्शा करके बैंक पहुचीं, मगर यहां आकर मालूम पड़ा कि बैंकाें की तो हड़ताल है। वह वापस रिक्शा कर घर पहुंची। इसमें उसके 60 रुपये भी खर्च हो गए और करीब 1.30 घंटा भी खराब हुआ। इसके अलावा वे काफी देर तक बैंक के बाहर इंतजार भी करते रहे। बैंक न खुलने पर उनको मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।

उद्यमी सबसे ज्यादा परेशान
कोट्स
मुझे बृहस्पतिवार को कोरियर से विदेशी खरीदार को नंबर देना था। वह एक बैंक से दूसरे बैंक के माध्यम होता है। हड़ताल के चलते बायर को नंबर नहीं भेज सके। इस नंबर के बिना बायर माल नहीं छुड़वा सका। इसका असर उनकी ही नहीं बल्कि देश की मार्केट पर विपरीत असर पड़ रहा है।
रमेश वर्मा, प्रधान, पानीपत हैंडलूम मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन
कोट्स
मैं बैंक हड़ताल के चलते पूरा दिन लेन-देन नहीं कर सका। जिसके चलते दिन पूरी तरह से मायूसी भरा रहा। मेरे को कई जगह से पेमेंट मिलनी थी, लेकिन पेमेंट नहीं मिल पाई। जिसके चलते वह भी आगे पेमेंट नहीं कर पाया। मार्केट में लेन-देन पर ही काम चलता है। मैं ही नहीं बल्कि पूरा बाजार हड़ताल से प्रभावित रहा।
सुरेंद्र रेवड़ी, प्रधान यार्न डीलर्स एसोसिएशन
कोट्स
मैं पूरा दिन ट्रांजेक्शन न होने पर परेशान रहा। उसकी कई जगह से पेमेंट आनी थी, लेकिन हड़ताल के चलते पेमेंट नहीं आ सकी। जिसके चलते वह भी अपने आगे पेमेंट नहीं कर पाए। यहां पर एक दिन में पेमेंट का लेन-देन न होने पर व्यवस्था चरमरा जाती है। पेमेंट न मिलने पर सामने का कस्टमर माल देने को खुश नहीं होता।
रमेश बंसल, प्रधान कंबल एसोसिएशन पानीपत

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