नेचुरल गैस से चलेगा अमोनिया प्लांट

Panipat Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
पानीपत। देश की नामी उर्वरक उत्पादक कंपनी एनएफएल के पानीपत अमोनिया प्लांट के आधुनिकीकरण का काम पखवाडे़ भर में पूरा होने जा रहा है। इसके बाद फ्यूल ऑयल पर आधारित पुराने प्लांट को नेचुरल गैस से चलाया जाएगा। इसके पूरा होने से जनवरी-2013 में शहर के लोगाें को एनएफएल के प्रदूषण से मुक्ति मिल सकेगी। इस काम पर करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च आएगा। आधुनिकीकरण के बाद मेन पावर और उर्वरकाें के लागत मूल्य में करीब 10 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।
उर्वरक और रासायन मंत्रालय के निर्देश पर नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड ने महत्वाकांक्षी योजना के तहत 29 जनवरी 2010 में अपने पानीपत स्थित अमोनिया प्लांट के आधुनिकीकरण का काम शुरू किया था। इस काम को पूरा करने की जिम्मेदारी एलएंडटी को सौंपी थी। अब तक यह अमोनिया प्लांट फ्यूल ऑयल से चलता था। मगर पिछले कई साल के दौरान अति आधुनिक प्लांटाें के स्थापित होने के कारण रिफाइनरियों से पर्याप्त मात्रा में फ्यूल ऑयल नहीं निकलता। इससे एनएफएल को फ्यूल ऑयल की आपूर्ति बनाए रखने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी। साथ ही फ्यूल ऑयल के इस्तेमाल से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर भी पड़ता है।
सुधरेगा शहरवासियों का स्वास्थ्य
नेचुरल गैस से प्लांट के चलने के कारण इससे सटी एनएफएल टाउनशिप, विकास नगर, राजनगर, संजय कालोनी, किशनपुरा नांगल खेड़ी और सिवाह समेत आसपास की अनेक कालोनियाें के लोगाें को फ्यूल ऑयल जलाने से होने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी। इतना ही हवाएं चलने के बाद प्रदूषण की मार झेलने वाले शहरवासियाें को भी प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा प्लांट के रखरखाव के खर्चों में भी कमी आएगी।
5.11 टन यूरिया का होता है उत्पादन
पानीपत एनएफएल प्लाट करीब 400 हेक्टेयर में फैला है। जबकि इसके सामने रेलवे लाइन पार करके 131 हेक्टेयर में टाउनशिप को बसाया है। प्लाट में नियमित रूप से 800 कर्मचारी काम करते हैं और इसके अलावा ठेकेदाराें के तहत निजी कंपनियाें के अनेक कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां पर सालाना 5.11 लाख टन खाद का उत्पादन होता है।
दादरी-पानीपत लाइन से मिलेगी गैस
प्लांट को नेचुरल गैस दादरी-पानीपत गैस लाइन से मिलेगी। इसके लिए पानीपत के गांव महराणा में मेन लाइन से 2.6 एमएम मोटाई की पाइप लाइन बिछाकर एनएफएल तक लाया गया। पूरी क्षमता पर उत्पादन करने पर एनएफएल में करीब 10 लाख स्टैंडर्ड मीटर क्यूब गैस इस्तेमाल होगी।

घटेगा सब्सिडी का बोझ
एनएफएल प्रशासन की माने तो प्लाट के आधुनिकीकरण के बाद लागत मूल्य में करीब 10 फीसदी की कमी आएगी। कुछ समय बाद यह आंकड़ा 12 फीसदी तक भी पहुंच जाएगा। ऐसे में केंद्र सरकार के उर्वरक और रासायन मंत्रालय द्वारा उर्वरकों पर दी जा रही सब्सिडी का बोझ कम होगा। लागत मूल्य कम होने पर सीधा असर एनएफएल के लाभांश के रूप मेें दिखाई देगा।
वर्जन
एनएफएल के आधुनिकीकरण का काम पूरा होने जा रहा है और जनवरी-2013 के प्रथम सप्ताह में यह प्लांट पूरी तरह से नेचुुरल गैस पर आ जाएगा। इस पर करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत आई है। नेचुरल गैस के इस्तेमाल से प्रदूषण से मुुुक्ति मिलेगी और उत्पाद लागत में करीब 10 फीसदी की कमी आएगी। लागत कम होने पर सरकार पर सब्सिडी का बोझ घटेगा।
विवेक आनंद, पीआरओ, एनएफएल

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