किसानों और कमेरे वर्ग के लिए संघर्ष करते रहे सांगवान

Panipat Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
सोनीपत। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किशन सिंह सांगवान के निधन से प्रदेश में लगभग प 15 वर्ष तक अपने दम पर भाजपा का झंडा उठाने वाले एक कद्दावर नेता का अंत हो गया। उन्होंने लोकसभा सदस्य होते हुए चुनाव से एकदम पहले चौटाला द्वारा टिकट न देने पर भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीतकर क्षेत्र में अपनी अहमियत दिखाई। इसके बाद उन्होंने अगला चुनाव भी भाजपा टिकट पर लड़ा और विजयी रहे। इस चुनाव में प्रदेश भर में कांग्रेस लहर के बावजूद वे सोनीपत लोस सीट से जीते व नौ सीटें कांग्रेस को मिलने के बाद भी सोनीपत सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। इसके बाद भाजपा में उनकी छवि इस कदर बढ़ी कि उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।
किशन सिंह सांगवान जमीन से जुड़े नेता थे। वकालत से सार्वजनिक जीवन शुरू करने वाले सांगवान सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार सांसद बने। पहली बार लोकदल के टिकट पर उन्होंने गोहाना विधानसभा से चुनाव लड़ा था। 15 जून 1948 को जिले के गांव नूरनखेड़ा में जन्मे किशन सिंह सांगवान ने आरंभिक शिक्षा जनता विद्या भवन बुटाना से ग्रहण की थी। 21 जून 1971 को उनकी शादी रोशनी देवी से हुई। उनके दो बेटे व दो बेटियां हैं। उनके छोटे बेटे प्रदीप सांगवान राजनीति में सक्रिय हैं और गोहाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था।
किशन सिंह सांगवान ने एमए करने के बाद कानून की पढ़ाई की और गोहाना में सक्रिय रूप से वकालत शुरू की। वकालत के अलावा उन्होंने शिक्षक के रूप में भी कार्य किया। वे पहली बार वर्ष 1987 में लोकदल के टिकट पर गोहाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और वर्ष 1990-91 में देवीलाल सरकार में प्रदेश के शिक्षा, कृषि व उद्योग मंत्री के रहे। 1998 में हरियाणा लोकदल (राष्ट्रीय) के टिकट पर पहली बार सोनीपत लोकसभा सीट से संासद चुने गए। उन्होंने 1999 में सोनीपत से ही भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और दूसरी बार सांसद चुने गए।
तीसरी बार भी उन्होंने सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से ही भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर लगातार तीन बार जीतने का गौरव हासिल किया। चौथी बार वे कांग्रेस के जितेंद्र मलिक से चुनाव हार गए। उसके बाद भी वे लगातार लोगों के बीच बने रहे। इस समय में वे भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य थे। वे ऐसे पहले सांसद थे जिन्होंने सांसद निधि का ग्रामीण विकास के लिए सदुपयोग किया। वे तीन बार सोनीपत से लगातार सांसद रहे। धर्मपाल मलिक ने कहा कि उन्हें सुबह जैसे ही किशन सिंह के निधन का समचार मिला तो उन्हें गहरा आघात लगा। वे अच्छे इंसान थे। उनके निधन से भाजपा-हजकां गठबंधन को नुकसान हुआ।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन अभिमन्यु ने उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि वे हमेशा किसान, कमेरा व गरीब वर्ग की आवाज उठाते रहे। हरियाणा प्रदेश में भाजपा को गांव-गांव तक पहुंचाने व आम आदमी की आवाज को बुलंद करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। भाजपा विधायक कविता ने कहा कि उनके निधन से किसान-मजदूरों की आवाज उठाने में ठहराव आ गया है। सांगवान ने तीन बार सांसद रहते हुए किसान-मजदूरों की भलाई के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए थे। गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए गए प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव जैन ने फोन पर बताया कि किशन सिंह सांगवान के निधन से भाजपा के साथ-साथ प्रदेश के लोगों को बड़ी क्षति पहुंची है। वे जनता में कापी लोकप्रिय थे। वे पहले ऐसे सांसद थे, जिहोंने गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं और सांसद निधि से उन्हें हल कराया।

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