हादसा का कारण लापरवाही तो नहीं!

Panipat Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
पानीपत/थर्मल। पानीपत थर्मल पावर स्टेशन की यूनिट नंबर पांच की ओवर हालिंग के समय पैनल फ्लैश आउट होना सवालों के घेरे में आ गया है। अधिकारी माने या न माने पर इस पूरे मामले में बड़ी लापरवाही बरती गई थी। इसके चलते एक वरिष्ठ तकनीशियन को काल का ग्रास होना पड़ा और दो अन्य बुरी तरह से झुलस गए थे। पैनल फ्लैश मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही अधिक मानी जा रही है। वहीं थर्मल में पूरा दिन आईएसओ की टीम आने की चर्चाएं चलती रही। थर्मल अधिकारियों ने इस बात को साफ मना कर दिया है।
थर्मल पावर स्टेशन पानीपत में वीरवार को भी पूरा दिन ऊहापोह की स्थिति बनी रही। चीफ इंजीनियर आपरेशन-2 जेपी अग्रवाल पीड़ित परिवार से मिले और उचित सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने हादसे में मृतक तकनीशियन के आश्रित परिवार को सवा लाख रुपये की नगद अंतरिम राशि और उसकी सेवानिवृत्ति समय तक पूरे लाभ एक नियमित कर्मचारी की तरह दिए जाएंगे।

यह है मामला
थर्मल की पांच नंबर यूनिट को ओवर हालिंग के लिए 20 अक्तूबर को बंद किया था और 30 दिन का मेंटेनेंस चल रहा था। छह नवंबर मंगलवार शाम पैनल फ्लेश आउट हो गया। इसमें 6.6 केवीए का करेंट था। हादसे में तकनीशियन रामभगत की झुलसने से मौत हो गई और फोरमैन-1 साहब सिंह व एक कंपनी का कर्मचारी अनिल बुरी तरह से झुलस गए थे। अधिकारियों ने दोनों को माडल टाउन स्थित एक निजी अस्पताल में भरती कराया और शव को सिविल अस्पताल में रखवा दिया था।
एक्सईएन नहीं एसई करेगा जांच
थर्मल अधिकारियों ने पैनल फ्लेश आउट मामले को गंभीरता से लिया है और इसकी जांच एसई लेवल के अधिकारी से कराई जाएगी। हादसे के बाद अधिकारियों ने एक्सईएन लेवल के अधिकारी के नेतृत्व में मामले की जांच कराने की कमेटी गठित की थी।

आईएसओ टीम के पहुंचने की रही चर्चाएं
पानीपत थर्मल पावर प्लांट में पूरा दिन दिन आईएसओ की टीम आने की चर्चाएं रही। कुछ लोगों ने प्लांट में टीम आने की बात कही, लेकिन उच्चाधिकारियों ने इस बार को सिरे से खारिज कर दिया। बताया जा रहा है कि दो नंबर यूनिट की ईएसपी बिल्डिंग चालू न होने पर टीम कुछ कदम उठा सकती है।
इन पांच सवालों के चाहिए जवाब
1 ओवर हालिंग का डेड परमिट था तो हादसा कैसे हुआ ?
2 मेंटेनेंस का काम कंपनी व थर्मल के बीच बंटा हुआ था तो दोनों के कर्मचारी एक जगह पर एक साथ काम पर कैसे कर रहे थे?
3 मेंटेनेंस के समय थर्मल के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी मौके पर मौजूद क्यों नहीं थे?
4 थर्मल के वरिष्ठ अधिकारियों ने तकनीशियनों के भरोसे इतना बड़ा काम क्यों छोड़ा?
5 हादसे के समय ऐसा क्या हुआ जो पैनल फ्लैश आउट हो गया?


सवाल : थर्मल की पांच नंबर यूनिट का मेंटेनेंस किस आधार पर चल रहा था।
जवाब : पांच नंबर यूनिट की वार्षिक ओवर हालिंग की जा रही थी। इसमें 30 दिन का शट डाउन था।
सवाल : क्या ओवर हालिंग का कांट्रेक्ट किसी कंपनी को दिया गया था।
जवाब : यूनिट की ओवर हालिंग का काम कंपनी व थर्मल कर्मचारी मिलकर कर रहे थे।
सवाल : यूनिट का वार्षिक ओवर हालिंग चल रहा था तो डेड परमिट क्यों नहीं लिया।
जवाब : यूनिट का डेड परमिट ही लिया गया था।
सवाल : यूनिट का डेड परमिट लिया गया था तो हादसा कैसे हुआ। कहीं न कहीं लापरवाही हुई होगी।
जवाब : इसी मामले की जांच को लेकर कमेटी का गठन किया गया है। बिना लापरवाही इस तरह का हादसा नहीं हो सकता।
सवाल : क्या यूनिट का मेंटेनेंस करते समय कोई वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी मौके पर मौजूद था।
जवाब : तकनीशियन रामभगत खुद एक कुशल कर्मचारी था और उनके साथ फोरमैन-वन था।
जेपी अग्रवाल, चीफ इंजीनियर, आपरेशन-टू, पानीपत थर्मल

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