एएसपी श्योराण समेत दस बरी

Panipat Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
पानीपत। बहुचर्चित मामले में एसटीएफ के तत्कालीन एएसपी अशोक श्योराण समेत अन्य दस को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण गुप्ता की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
यह था मामला
आरोप था कि 10 मार्च 2010 की सायं श्रीराम चौक पर स्थित शेयर ब्रोकर रजत के कार्यालय में दो वाहनाें में सवार होकर हथियारबंद कई लोग पहुंचे और अपने आपको एसटीएफ की टीम के सदस्य बताते हुए उसे धमकाया कि वह गलत काम करता है। कार्रवाई से बचाने के लिए 10 लाख की मांग की और बाद में 6 लाख में सौदा तय हो गया। भयभीत शेयर ब्रोकर ने आनन-फानन में रकम का इंतजाम कर उन्हें सौंप दी, जिसे लेकर वहां से चले गए।
आरोप है कि इसके बीच एक युवक हलवाई हट्टा स्थित ज्वेलर बिशन कुमार मल्होत्रा के पास पहुंचा और उससे एसटीएफ का सदस्य बताते हुए डरा धमकाकर मोटी रकम की मांग की। बाद में एक लाख में सौदा तय हो गया और ज्वेलर ने शाम को आकर ले जाने की बात कही। मगर शाम को आने पर ज्वेलर द्वारा लोकल पुलिस बुलाने बात कहने पर युवक वहां से खिसक गया। मगर उसकी तस्वीर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
बाद में दोनों व्यापारियाें ने पुलिस को मामले की शिकायत कर दी। थाना सिटी पुलिस ने डकैती और शस्त्र की धाराआें समेत अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज छानबीन शुरू कर दी। आरोप है कि जांच के दौरान सीसीटीवी कैमरे में आए युवक की पहचान एसटीएफ के हेडकांस्टेबल जगबीर के रूप में हुई। बाद में पुलिस ने एसटीएफ के पांच संदिग्ध जवानाें की शिनाख्त परेड कराई तो ज्वेलर ने कहा कि इनमें से कोई सदस्य उसके शोरूम पर नहीं आया था। वहीं स्वास्थ्य खराब होने की बात कहते हुए शेयर ब्रोकर ने परेड में आने में असमर्थता जताई थी।
अगले दिन पानीपत पुलिस ने अपने स्तर पर मामले की छानबीन करने के बाद एसटीएफ के एएसपी अशोक श्योराण, एएसआई विजयपाल, एचसी जगबीर सिंह, एचसी ईश्वर सिंह, एचसी राजकपूर, ईएचसी महेेंद्र सिंह, ईएचसी धर्म सिंह और विनोद कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार दोनाें मामलोें में आठाें की संलिप्तता सामने आई थी। आरोप था कि उन्होंने 6 लाख की उगाही की बात स्वीकार कर ली। पूछताछ पूरी होने पर एएसपी समेत आठों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जहां से उन्हें रिमांड पर भेज दिया। बाद में इस मामले में उनके दो अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उधर, मामले के ज्यादा तूल पकड़ने पर सरकार ने एसटीएफ को भंग कर दिया।

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