थर्मल में सिर्फ एक दिन का कोयला

Panipat Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
थर्मल। हरियाणा में बिजली कभी भी झटका दे सकती है। सुपर थर्मल पावर स्टेशन में कोयले का स्टाक क्रिटिकल जोन में पहुंच गया है। स्टाक में एक ही दिन का कोयला बचा है। कोयले की सप्लाई बढ़ाने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली और झारखंड भेजा है।
कोयला से चलने वाले 1367.6 मेगावाट क्षमता के सुपर थर्मल पावर प्लांट में रोजाना 8 यूनिटाें को चलाने के लिए करीब 22 से 23 हजार टन कोयला की खपत होती है। मरम्मत के चलते पांच नंबर यूनिट कई दिन से बंद पड़ी है। पीछे से कोयले की पर्याप्त सप्लाई न होने के कारण स्टाक क्रिटिकल जोन में पहुंच गया और स्टाक में सिर्फ एक दिन का कोयला ही बचा है। शुक्रवार को कोयले के पांच रैक आने के कारण स्थिति बिगड़ने से बच गई। किन्हीं कारणाें से सप्लाई में और कमी आ गई तो थर्मल में उत्पादन बंद हो सकता है।
होना चाहिए 25 दिन का स्टाक
थर्मल को चलाने के लिए थर्मल प्रशासन को रिजर्व स्टाक से कोयला इस्तेमाल करना पड़ा रहा है। नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन के नियमानुसार रिजर्व स्टाक में 25 दिन का कोयला होना चाहिए है, मगर पर्याप्त सप्लाई नहीं होने के कारण उसमें से कोयला लेने के कारण स्टाक में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा है।
खनन श्रमिकाें की हड़ताल ने डाला रोड़ा
कोयले की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा झारखंड की कोयला खानाें से होता है। खनन के दौरान कुछ दिन पहले वहां पर एक श्रमिक की मौत हो गई। मुआवजे की मांग को लेकर खनन प्रबंधन और श्रमिकाें में टकराव हो गया। जिसकी वजह से कई ब्लाक के श्रमिक हड़ताल पर चले। इसका सीधा असर अब सप्लाई पर पड़ रहा है।

कोयला नहीं मिलने पर संकट
इससे पहले मंगलवार को थर्मल में दो दिन का कोयला ही बचा था। हालांकि शुक्रवार को कोयले के पांच रैक आने के बाद स्थिति में सुधार हुआ था। अब रिजर्व स्टाक में भी एक दिन का कोयला बचा है। इस स्थिति क्रिटिकल जोन का नाम दिया जाता है। जानकारों की मानें तो इसके बाद यूनिट बंद करने की नौबत आ जाती है। जिससे कम से कम 30 लाख रुपये का जेनरेशन लास होता है। यदि एक यूनिट बंद की जाए तो वह दोबारा से रनिंग में आने के लिए 10 से 15 घंटे का समय लेती है।

वर्जन
कुछ अरसे कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है। प्लांट को चलाने के लिए रिजर्व स्टाक से कोयला लिए जाने के कारण सिर्फ एक दिन का कोयला बचा है। भंडारण क्रिटिकल जोन में पहुंच गया है। स्थिति को संभालने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को दिल्ली और झारखंड भेजा गया है। इसके अलावा कोल इंडिया के अधिकारियाें से लगातार बात की जा रही है।
जेपी अग्रवाल, चीफ इंजीनियर आपरेेशन-2

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