प्रदर्शन के बाद शुरू हुई खरीद

Panipat Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
पानीपत। किसानों और आढ़तियों द्वारा किए गए संयुक्त प्रदर्शन के बाद आखिर सोया प्रशासन जाग गया। मंगलवार को हुए प्रदर्शन के बाद मंडी में 1121, बासमती और मुच्छल समेत अन्य किस्मों की बोलियां भी बंद कर दी गई थी। इसके बाद मार्केट कमेटी और जिला प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर पहुंचे कान्फेड के डीएम रमेश मेहरा और मार्केट कमेटी सचिव देवेंद्र ढुल के आश्वासन पर किसान शांत हुए। बाद में पीआर की खरीद भी शुरू हो गई।
बीते सप्ताह भर से अनाज मंडी में बंद पड़ी पीआर धान की बोली आखिरकार वीरवार को शुरू हो गई। इससे किसानों के मुरझाये चेहरों को कुछ रौनक जरूर आई, लेकिन कई किसानोें के माथों पर परेशानी की लकीरें भी साफ झलक रही थी। किसानों को प्रशासन और मार्केट कमेटी पर विश्वास नहीं है। वे कह रहे थे कि धान की बोली पूरा सीजन सुचारु रूप से चलेगी, इसकी क्या गारंटी है?
15 हजार क्विंटल धान जमा
सप्ताह भर से बोली न होने के कारण पानीपत अनाज मंडी में करीब 15 हजार क्विंटल धान के ढेर लग गए। इससे मंडी में बिक्री के लिए खेतों से आने वाली धान को फड़ पर डालने के लिए समस्या आने लगी है। सिवाह पाला राम, डाडोला वासी किसान सूरजभान, पाला राम, नरेश और मांडी निवासी किसान सोमवीर ने बताया कि वे 10 दिन पहले पीआर धान लेकर आए थे। तभी से ही उसकी बोली होने का इंतजार कर रहे हैं। लगातार मंडी में रहना उनके लिए परेशानियां खड़ी कर रहा है। उनके ऊपर मार्केट फीस का बोझ अलग से पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाए कि धान की बोली नहीं होना सोची समझी साजिश है।
एक हजार क्विंटल की बोली
मंगलवार को दोपहर बाद शुरू हुई पीआर की बोली के बाद लगभग एक हजार क्विंटल धान की बोली हो पाई। मार्केट कमेटी अधिकारियोें ने किसानों के आश्वासन दिलाया है कि अब बोली सुचारु रूप से चलेगी।

अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने सोमवार और मंगलवार के अंक में मंडियों में धान की बोली न होने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। खबर के माध्यम से प्रशासन को चेताया था कि किसानों के सब्र का बांध कभी भी टूट सकता है। मंगलवार को भी पीआर धान की बोली न होने से किसानाें का सब्र टूट गया और वे विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर हुए। विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से अनाज मंडी एसोसिएशन के एक गुट के प्रधान धर्मबीर मलिक, संरक्षक जय भगवान गोयल, भाकियू के जिलाध्यक्ष सुखबीर आटा, तेजपाल फौजी बापौली, जोगिंद्र इसराना, सत्यनारायण मतलौडा, कार्यकारी प्रधान कुलदीप और पूर्व प्रधान सुरेश दहिया समेत अन्य मौजूद रहेे।
वर्जन
पीआर धान की खरीद बोली नहीं होने से किसान, आढ़ती और प्रशासन सभी परेशान थे। मंगलवार को किसान और आढ़तियों ने इस संबंध में विरोध भी जताया। मौके पर पहुंचकर किसान शांत किए और पीआर धान समेत अन्य किस्मों की बोली शुरू कराई गई। अब किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
देवेंद्र ढुल, सचिव, मार्केट कमेटी, पानीपत
खराब मौसम ने बढ़ाई चिंता
आसमान में छाये काले बादलों को देखकर किसान परेशान हैं। जिन किसानों की धान मंडी में पड़ी है वे भी परेशान है। जिनकी खेतों में हैं वे भी परेशान है। किसानाें की मानें तो अगर बारिश होती है तो मंडी में पड़ी धान की ढेरियां तो कम प्रभावित होंगी, लेकिन खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल जरूर प्रभावित होगी।

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