बिना बिजली और पानी के जंगल में रह रहे हैं 80 लोग

Panipat Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
मतलौडा। रिफाइनरी और नेफ्था क्रैकर प्लांट के बीच पड़ने वाले जंगल में बसी मजहबी सिख बस्ती के नौ परिवार कई सालाें से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। रिफाइनरी की स्थापना के दौरान बोहली गांव के शिफ्टिंग के दौरान यह बस्ती सर्वे में छूट गई जिसका खामियाजा आज तक यहां के निवासी झेल रहे हैं।
बताया जाता है कि रिफाइनरी प्रशासन द्वारा वर्ष 1998 में सिठाना गांव के पास बोहली और अन्य बस्तियों के लोगों को प्लाट देकर न्यू बोहली गांव में बसाया गया था। लेकिन उनकी सुध किसी ने नहीं ली। दुनियादारी से बेखबर इन परिवारों के करीब 80 सदस्य अपने दुखों भरी जिंदगी के दर्द को अपने सीने में दबाए हुए अपनी किस्मत को रो रहे हैं। इन परिवारों के मुखिया गुरनाम सिंह, जीत सिंह, कुलदीप सिंह, जीवन सिंह, कुलविंद्र कौर, बलवंत सिंह, महताब सिंह, परमजीत सिंह व कश्मीर सिंह की अपना दुखड़ा सुनाते हुए आंखे नम हो गईं।
उन्हाेेंने बताया कि बारिश के दिनों में उनकी रातें फ्लाईओवर के नीचे गुजरती हैं। चारों ओर जंगल से घिरी इस छोटी सी बस्ती में न पीने के पानी की सुविधा है ओर न ही बिजली की। बस्ती के सभी मकान कच्चे हैं जो मिट्टी और सरकंडों से बनाए हुए हैं। बारिश के दिनों में इन घरों में पानी भर जाता है। इससे मिट्टी से बने यह मकान गिर जाते हैं। बस इसी डर के मारे इस बस्ती के लोग अपने बच्चों को लेकर नजदीक ही नेफ्था क्रैकर और रिफाइनरी को जोड़ने वाले फ्लाईओवर के नीचे चले आते हैं।
हर समय मौत के मुंह में रहते हैं ये परिवार
नेफ्था प्लांट द्वारा टेस्टिंग का गंदा और जहरीला पानी इस जंगल में छोड़ा जाता है। जंगल व गंदगी के बीच बसी इस बस्ती में ये परिवार रहता है। बदबू व गंदगी के कारण इस जंगल में मच्छर और जहरीले सांप पैदा हो जाते हैं। अब तक इस बस्ती के दो युवक मलकियत सिंह और कुलवंत सिंह रात को सोते समय सांप के काटे जाने से अपनी जान गंवा चुके है। सांप के काटे जाने से तीन भैसों की मौत हो चुकी है।

डीडीपीओ ने बस्ती का किया मुआयना
जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने सप्ताहभर पहले इस बस्ती का निरीक्षण कर जायजा लिया और इन लोगों के दुख दर्द को बांटने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उपायुक्त को बस्ती की रिपोर्ट सौंप दी है। जैसे ही उपायुक्त के आदेश होंगे इन परिवारों को न्यू बोहली गांव में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

‘इन परिवारों के वोटर कार्ड, राशन कार्ड और चूल्हा टैक्स इसी गांव का है। गांव शिफ्ट होने के दौरान हुए सर्वे में यह बस्ती छूट गई थी। यह परिवार वाकई नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। गांव में खाली पंचायती जमीन भी है। अगर प्रशासन के आदेश हुए तो इन्हें गांव में बसाया जाएगा।
- चमेली देवी, सरपंच न्यू बोहली

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