यहां ‘फिटनेस टेस्ट’ के बाद मिलती है बुढ़ापा पेंशन!

Panipat Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
पानीपत। नगर निगम में बुढ़ापा और विकलांग पेंशन लेना किसी फिटनेस टेस्ट देने से कम नहीं है। यहां पेंशन बांटने का काम तीसरी मंजिल पर होता है। 60 साल से ऊपर उम्र वाले और शारीरिक तौर पर अक्षम लोगों के लिए इस मंजिल पर पेंशन लेना कितना मुश्किल होता है। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
आलम यह है कि वे आसानी से न तो तीसरी मंजिल पर चढ़ पाते और न ही पेंशन छोड़ पाते। ऐसे में उनकी दुश्वारी बढ़ गई है मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं। कंवर भान (84) ने बताया कि मुझे पेंशन लेने के लिए तीसरी मंजिल तक आना पड़ा। सीढ़ियां चढ़ते वक्त मेरे जोड़ों में दर्द होने लगा। इस उम्र में इतनी ऊपर चढ़ना काफी कष्टदायक रहा, मगर क्या करें बुढ़ापा काटने के लिए पेंशन भी लेना जरूरी है।
मान कौर (85) ने बताया कि मैं अपनी बहू के साथ पेंशन लेने आई हूं। लेकिन पेंशन तीसरी मंजिल पर बांटी जा रही है। ऊपर चढ़ते-चढ़ते मुझे सांस चढ़ गए। इस उम्र में इतना चला नहीं जाता। प्रशासन सब कुछ समझ व देखकर भी बुजुर्गों के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रहा।
सौदापुर निवासी सुदेश (चलने में दोनों पैरों से असमर्थ) ने बताया कि मैं अपने भतीजे के साथ आई हूं। मैं चलने में असमर्थ हूं। इसके बाद भी पेंशन के लिए धक्के खाने पड रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से पेंशन बांटने के लिए नीचे व्यवस्था कराने की मांग की है।
पेंशन लेनेे आए राज किशन ने बताया कि इस उम्र में पेंशन के लिए तीसरी मंजिल कर धक्के खाने की हिम्मत नहीं रही। खास कर शारीरिक रूप से अक्षम लोगाें में। यहां बैठने तक के लिएजगह नहीं है। ऐसे में परेशानी दोहरी हो जाती है।
वर्जन
नीचे जगह कम होने की वजह से पेंशन बांटने का स्थान तीसरी मंजिल पर रखा गया। पेंशन बांटते समय आवेदनकर्ता की जांच की जाती है। अगर कोई तीसरी मंजिल पर आने में असमर्थ है मैं उसकी शारीरिक अक्षमता का जायजा लेने नीचे जाता हूं।
कप्तान सिंह, एसओ, नगर निगम

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