अंध विद्यालय के विद्यार्थियों का धरना

Panipat Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
पानीपत। प्रदेश का एकमात्र राजकीय अंध विद्यालय कंडम भवन में चल रहा है। विभाग के अधिकारी खुद भवन को कंडम घोषित कर प्लानिंग में उलझ गए। इसके अलावा स्कूल में सुरक्षा से लेकर साफ सफाई, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं में भी अनदेखी बरती जा रही है। अनदेखी से परेशान विद्यार्थी मोरचा खोलकर स्कूल के गेट पर बैठ गए। विद्यार्थियों द्वारा रखी समस्याओं का अमर उजाला टीम ने जायजा लिया हालत हैरान करने वाले थे।
17 की जगह छह शिक्षक
अंध विद्यालय में शिक्षक वर्ग के 17 पद हैं, लेकिन स्कूल मात्र छह ही शिक्षक हैं। अंग्रेजी जैसे विषय का कोई भी शिक्षक स्कूल में नहीं हैं। स्कूलों में शिक्षा के अधिकार को लागू नहीं किया गया। विद्यार्थियों के पास रिकार्डिंग और कंप्यूटर जैसे आधुनिक उपकरण भी नहीं हैं। पीटीआई के नहीं होने पर खेलों में भाग नहीं ले पा रहे।
डाक्टर की नियुक्ति नहीं
अंध विद्यालय में एक डाक्टर का पद है, जो 24 घंटे स्कूल में रहना चाहिए और विद्यार्थियों जरूरत पड़ने पर चेकअप और इलाज करना होता है, लेकिन स्कूल में डाक्टर नहीं है। एक चिकित्सक दिन में दो घंटे ही चेकअप करता है। इसके बाद किसी के बीमार होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। इससे आने और जाने सहित निजी अस्पताल की फीस अपने स्तर पर चुकानी पड़ती है। स्कूल में प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है।
सफाई में बरत रहे अनदेखी
स्कूल में साफ सफाई की तरफ कोई ध्यान नहीं है। क्लास रूम और छात्रावास की सफाई प्रतिदिन नहीं हो रही। स्कूल परिसर में खड़ा घास हादसों को न्योता दे रहा है। छात्रावास में मच्छरों की रोकथाम पर कोई ध्यान नहीं है। इससे विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कंडम भवन में चल रहा स्कूल
स्कूल का भवन करीब 65 वर्ष पुराना है। विभाग की टीम गत वर्ष कंडम भी घोषित कर चुकी है। निदेशालय की टीम दो बार स्कूल का दौरा कर चुकी हैं, लेकिन भवन के निर्माण की तरफ कोई ध्यान नहीं है। स्कूल के कमरों की छत का प्लास्तर टूट जाता है। बरसात के समय छत टपकने लग जाती है। इसके अलावा दरवाजे और खिड़कियां टूटी हैं। किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है।
गेट पर नहीं सुरक्षा के बंदोबस्त
अंध विद्यालय में सुरक्षा के बंदोबस्त पुख्ता नहीं हैं। दिन के समय स्कूल गेट पर कोई भी चौकीदार नहीं होता। रात को एक चौकीदार तैनात होता है। ऐसे में कोई भी असामाजिक तत्व आसानी से किसी भी वारदात को अंजाम दे सकता है। स्कूल और विभागीय अधिकारी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे।
बिजली भी बनी परेशानी
अंध विद्यालय में बिजली के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। वोल्टेज कम होने पर पंखे भी ढंग से नहीं चल पाते। स्कूल प्रबंधन जनरेटर और इंवर्टर की सुविधा नहीं कर रहे। बिजली जाते ही विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वर्ष 1982 में दी थी छत
राजकीय अंध विद्यालय करीब दो एकड़ में है। स्कूल की चहारदीवारी 1957 और छत 1982 में दी गई थी। इसमें 12 क्लास रूम हैं और छात्रावास में छात्रों की तीन और छात्राओं की दो बैरक हैं। इस समय स्कूल में 76 छात्र और 23 छात्रा हैं। इनमें से 11वीं और 12वीं कक्षा के 19 छात्र और छात्रा दूसरे स्कूल में पढ़ते हैं।
गेट पर धरना और नारेबाजी
विद्यार्थियों ने स्कूल में सुविधाओं की लगातार अनदेखी बरतने पर विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा। विद्यार्थी शुक्रवार को स्कूल गेट पर धरने पर बैठ गए। छात्र कुलवंत और चरणजीत ने बताया कि स्कूल में विद्यार्थियों की सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इससे उनको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मजबूर होकर विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा। मुख्याध्यापक महिपाल सिंह तोमर ने भी विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे जिद पर अड़े रहे। इस मौके पर रवि, पंकज, सुशील, श्याम लाल, जमील, जगदीश, सुखमाल, हरीश, उमेश, नवीन, कुलवंत, ललित, विकास और गौरव मौजूद रहे।
स्कूल में शिक्षक वर्ग की कमी है, लेकिन उनकी नियुक्ति तेजी से चल रही है। स्कूल में सरकार द्वारा दी गई हिदायतों अनुसार चिकित्सक की व्यवस्था की गई है। चिकित्सक इतनी राशि में दो घंटे ही दे पाता है। स्कूल के नए भवन निर्माण की योजना पर निदेशालय स्तर पर काम चल रहा है। विद्यार्थियों को समझाकर शांत किया। महिपाल सिंह तोमर, मुख्याध्यापक, राजकीय अंध विद्यालय

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