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पर्यावरण बचा कम और झेला ज्यादा, वीआईपी के लगाए पौधों तक हुए गायब

Rohtak Bureau Updated Sun, 04 Jun 2017 07:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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पानीपत। प्रदूषण से हर कोई ग्रस्त है। लोगों को पेड़-पौधे लगाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। इसके बाद भी कम लोग ही इस विषय के प्रति सजग हो रहे हैं। दूसरी ओर पेड़ों को काटने का सिलसिला जारी है। वर्षों पहले लगाए गए पेड़ों को अब सड़क चौड़ीकरण के नाम पर काटा जा रहा है। पेड़ों के लगातार कटने और वाहनों के बढ़ने से प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंचता जा रहा है। इस ने अब जनजीवन को प्रभावित करना भी शुरू कर दिया है। इसका अंदाजा लोगों में बढ़ रही सांस की बीमारियों से लग सकता है। पेड़ कटने से ऑक्सीजन की कमी भी होती जा रही है। पेड़-पौधे लुप्त होने की वजह से हरियाली खत्म हो रही है। जिले में पर्यावरण बचा कम और परेशानियां बढ़ती जा रही है।
पर्यावरण के प्रति लापरवाही इतनी अधिक है कि जिले में पौधरोपण दिवस या अन्य खास मौकों पर वीआईपी द्वारा लगाए गए पौधे भी जिले में नजर नहीं आ रहे। जिला प्रशासन पौधों की देखभाल नहीं कर पा रहा। पानीपत जिले में कारखानों की छोटी-बड़ी 20 हजार से अधिक इकाइयां हैं। इनसे करीब लाखों टन कचरा खेतों, खाली पड़ी जमीन, नालों और नदियों में गिराया जा रहा है। इससे भी तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा है। जिले में विकास तो हो रहा है, लेकिन पेड़-पौधों की संख्या कम होती जा रही है।
जिले में लगातार घट रहे हैं पेड़ और जंगल
जिले में विकास नाम पर हजारों की संख्या में पेड़-पौधों की बली चढ़ाई जा रही है। जिले में 4713 हेक्टेयर भूमि पर वन थे। लेकिन, अब जिले में 4152 हेक्टेयर भूमि पर ही वन रह गए है। जिले में करीब 14.39 लाख से अधिक पेड़ थे। यह अब 12.20 लाख ही बचे हैं।
औद्योगिक इकाइयों और वाहनों की संख्या बढ़ने से बढ़ा प्रदूषण
जिले में औद्योगिक इकाइयों और वाहनों की संख्या बढ़ रही है। इससे पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ रहा है। पानीपत जिले के शहर में हर छठे घर में इकाई है। इनसे बड़ी मात्रा में कचरा और वेस्ट पदार्थ नालियों के माध्यम से नदियों में गिर रहा है। प्रत्येक वर्ष पर्यावरण प्रदूषण पर देश में सब पौधे लगाने की शपथ लेता है। लेकिन, कुछ देर बाद भूल जाते हैं। वन विभाग हर साल मानसून सीजन में लाखों पौधे लगाने का दावा करता है। इसके बाद भी हरियाली आच्छादित क्षेत्रफल कम ही होता जा रहा है। जिले में सड़क बनाने के नाम पर 18 हजार के करीब पेड़ काट दिए गए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की माने तो प्रदूषण का स्तर 61 पैरामीटर तक होना चाहिए, लेकिन पिछले माह यह स्तर 81 था। इससे लोगों को परेशानी हुई।


जिले में 4152 हेक्टेयर भूमि वनों के लिए बची है। जिले में अभी 12 लाख के करीब पेड़ हैं। जिले में 18 हजार से अधिक पेड़ सड़क के चौड़ीकरण के लिए काट दिए गए हैं। इससे सड़क किनारे पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है।
विजेंद्र कुमार, डीएफओ पानीपत।

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