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मजीठिया की प्रेसवार्ता: राज्यपाल से की विधायकों की खरीद फरोख्त की जांच कराने की मांग, आप की मंशा पर दागे सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 23 Sep 2022 12:38 AM IST
सार

मजीठिया ने कहा कि राज्यपाल ने दिल्ली के तर्ज पर राजनीतिक ड्रामा करने के लिए विशेष सत्र की मंजूरी वापस लेकर सही काम किया है। उन्होंने राज्यपाल को संबोधित करते हुए कहा कि आपको यहीं रुकना नहीं चाहिए।

बिक्रम सिंह मजीठिया।
बिक्रम सिंह मजीठिया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब के राज्यपाल से आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों की सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने का आग्रह किया है।



उन्होंने कहा कि केवल पारदर्शी जांच से ही मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। प्रेस वार्ता में अकाली नेता ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या भाजपा के किसी नेता या बिचौलिये ने आप के विधायकों को पार्टी बदलने के लिए 25-25 करोड़ रुपये की पेशकश की थी? उन्होंने कहा कि वैकल्पिक रूप से अगर आप के आरोप झूठे पाए जाते हैं तो जनादेश का अपमान करने के लिए मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।


मजीठिया ने कहा कि राज्यपाल ने दिल्ली के तर्ज पर राजनीतिक ड्रामा करने के लिए विशेष सत्र की मंजूरी वापस लेकर सही काम किया है। उन्होंने राज्यपाल को संबोधित करते हुए कहा कि आपको यहीं रुकना नहीं चाहिए।

अगर जरूरत पड़ी तो एक केंद्रीय एजेंसी से आरोपों की जांच के आदेश दिए जाने चाहिए। विश्वास प्रस्ताव के लिए विशेष सत्र बुलाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए मजीठिया ने कहा कि अगर आप सरकार लोगों में अपने प्रति विश्वास परखना चाहती है तो उसे विधानसभा भंग कर चुनाव कराना चाहिए। इससे इसकी लोकप्रियता का पता चल जाएगा।

मजीठिया ने खरीद-फरोख्त मामले में दर्ज एफआईआर की प्रति दिखाते हुए कहा कि नौ दिन बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक भी गिरफ्तारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

भले ही आप ने भाजपा नेताओं और बिचौलियों के खिलाफ आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि एफआईआर में आप के विधायक शीतल अंगुराल पर हमले या उन्हें मिली धमकी का भी कोई जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति के दो ही कारण हो सकते हैं, या तो दर्ज एफआईआर में कोई दम नहीं है, या राज्य पुलिस प्रमुख ने इसे निपटने में अक्षमता दिखाई है।

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