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किसान आंदोलन के बीच डीएपी-एनपीके के बढ़े दामों पर घमासान

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 09 Apr 2021 02:01 AM IST
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चंडीगढ़। किसान आंदोलन के बीच डीएपी और एनपीके के दामों में की गई बेहताशा बढ़ोतरी को लेकर विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हो गए हैं। एक साथ सभी राजनीतिक दलों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए तुरंत प्रभाव से बढ़ी दरें वापस लेने की मांग की है। वहीं, भारतीय किसान यूनियन ने इस फैसले को किसानों को बर्बाद करने वाला करार दिया है। भाकियू का कहना है कि सरकार ने साबित कर दिया है कि किसानों को लेकर मंशा कैसी है, किसानों की आय घटानी है और उद्योगपतियों की बढ़ानी है।
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किसानों के साथ दुश्मनों से भी बुरा व्यवहार कर रही सरकार : हुड्डा
राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने डीएपी के दामों में की गई भारी बढ़ोत्तरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी अधिक बढ़ोत्तरी पिछले 70 साल के इतिहास में कभी नहीं हुई। डीएपी के दाम बढ़ने से खरीफ की बुवाई शुरू होते ही हाहाकार मच जाएगा। सरकार इस बढ़ोतरी को तुरंत वापस ले। सांसद ने कहा कि किसान पहले ही दर्द से तड़प रहा है ये भारी भरकम चोट वो कैसे बर्दाश्त करेगा? पता नहीं सरकार उससे कौन सी दुश्मनी निकाल रही है। सरकार जो सौतेला व्यवहार देश के किसानों के साथ कर रही है वैसा व्यवहार तो कोई दुश्मन के साथ भी नहीं करता। उन्होंने कहा कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का झांसा देकर सत्ता हथियाने वाली भाजपा ने किसानों की आमदनी दोगुनी तो छोड़िये, किसान का खर्चा कई गुना बढ़ा दिया। पहले ही भाजपा सरकार ने महंगे डीजल, पेट्रोल के दाम बढ़ा रखे हैं।

किसानों को बर्बाद करने पर तुली सरकार : सैलजा
कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि किसान वर्ग पहले ही भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों से तंग हाल है। सैलजा ने कहा कि 50 किलो वाले डीएपी खाद का बैग किसान को पहले 1200 रुपये में पड़ता था। अब उसका रेट 1900 रुपये हो गया है। इसी प्रकार 50 किलो वाले एनपीके की कीमत में 51.89 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। एनपीके के 50 किलो के बैग के दामों में 615 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 1185 से 1800 रुपये का कर दिया है। पहले यूरिया का बैग 50 किलोग्राम का आता था, जिसके दामों में बढ़ोतरी कर दी गई थी और वजन घटाकर 45 किलोग्राम कर दिया गया था। सैलजा ने मांग की कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।
क्या ऐसे बढ़ेगी किसान की आय : भाकियू
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूूनी और रतन मान दोनों ने इस फैसले को किसान विरोधी बताया है। भाकियू नेताओं ने कहा कि सरकार ने अपनी मानसिकता दिखा दी है कि किसानों का कितना भला चाहती है। सड़कों पर बैठे किसानों से दुश्मनों जैसा व्यवहार अच्छा नहीं है। क्या सरकार ऐसे किसानों की आय बढ़ाना चाहती है। किसान पहले से ही तीन कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, अब यह खाद की बढ़ी मांग को वापस कराना भी हमारी मांग हो गई है। कड़ा विरोध जताते हुए भाकियू ने चेताया है कि इस फैसले को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाएगा।
पुराने स्टाक लागू रहेंगी पुरानी दरें : सिंह
इफको हरियाणा के मुख्य प्रबंधक (विपणन) शमशेर सिंह ने बताया कि इफको के पास तकरीबन 13 हजार मीट्रिक टन डीएपी का पुराना स्टॉक है, जबकि एनपीके का 5200 टन पुराना स्टॉक है। इनकी बिक्री पुरानी दरों से अनुसार होगी। नया स्टॉक आने के बाद नई दरों पर बेचा जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में हर साल करीब छह लाख टन डीएपी की खपत होती है। इसमें से करीब 70 फीसदी की मांग इफको द्वारा की जाती है, क्योंकि प्रदेशभर में सहकारी समितियों के माध्यम से यह खाद किसानों तक पहुंचता है।

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