पिंजौर-कालका शहरी कॉम्प्लेक्स को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी

Panchkula Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
नई दिल्ली/पंचकूला। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हुड्डा के पिंजौर-कालका शहरी कॉम्प्लेक्स को हरी झंडी प्रदान कर दी। हरियाणा सरकार की ओर से किए गए अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर राज्य सरकार को बड़ी राहत प्रदान की है।
जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता मंजीत दलाल से इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए। पीठ ने सभी दस्तावेजों पर गौर करने के बाद कहा कि याचिका निराधार है, राज्य सरकार की ओर से किए गए अधिग्रहण में कोई खामी नहीं है। अदालत इस मसले पर दायर तमाम याचिकाओं को खारिज करती है। याद रहे कि इस मसले पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के वर्ष 2010 के आदेश के खिलाफ रविंद्र सिंह सहित अन्य ने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
809 एकड़ का किया था अधिग्रहण
राज्य सरकार की ओर से 809 एकड़ का अधिग्रहण किया गया था जो रिहायशी कॉम्प्लेक्स विकसित करने के लिए था। लेकिन भूमि अधिग्रहण की धारा-4 की अधिसूचना जारी किए जाने से पहले 350 एकड़ जमीन निजी बिल्डरों की ओर से खरीदी जा चुकी थी। 105 एकड़ अधिग्रहीत जमीन सिंचाई विभाग के पाले में चली गई थी, जोकि बांध के निर्माण के लिए पहले से तय की जा चुकी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण में अनियमितताएं बरती गईं। उनका यह भी आरोप था कि निजी बिल्डरों को राज्य सरकार ने जमीन अधिग्रहीत करने के बाद बेची। जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार की दलील थी कि धारा-4 के तहत अधिसूचना जारी किए जाने से पहले ही बिल्डरों की ओर से जमीन की खरीद की जा चुकी थी। इसके अलावा जमीन पर भवन निर्माण की मंजूरी भी ली जा चुकी थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब हुडा व रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ और इरो अब कालका-पिंजौर में अपने-अपने प्रोजेक्ट का निर्माण जारी रख सकेंगे। साल 2009-10 में हरियाणा सरकार ने कालका-पिंजौर अरबन कांप्लेक्स के नाम से योजना बनाई। इसके तहत गांव भगवानपुर, इस्लाम नगर, भोगपुर और बक्शीवाला की जमीन अधिग्रहण कर सेक्टर 2,4 और 5 बसाने की योजना थी। डीएलएफ और इरो रियल स्टेट कंपनी की जमीन छोड़ दूसरे जमींदारों की जमीन अधिग्रहण सरकार ने कर ली थी। इस मामले के खिलाफ ताराचंद और रविंदर सिंह हाईकोर्ट चले गए। ताराचंद और दूसरे जमींदारों की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सभी प्रोजेक्टों की गतिविधि पर रोक लगा दी। इस फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में स्पेशल लीव पटीशन (एसएलपी) दायर की। सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में सरकार को राहत देते हुए निर्माण की छूट दी और केस की सुनवाई पेंडिग रख ली।

कोट
इस बारे में सूचना मिली है कि कालका-पिंजौर में हुडा व रियल एस्टेट कंपनियों के निर्माण पर लगी रोक हट गई है।
हितेश शर्मा, डीटीपी पंचकूला।

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