जमीन घोटाले में फंसे पूर्व राजस्व अधिकारी और नायब तहसीलदार

Panchkula Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
पंचकूला। श्री जेनेंद्रा गुरुकुल ट्रस्ट के भूमि घोटाले में पंचकूला के पूर्व जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) और नायब तहसीलदार सहित 12 आरोपियों की भूमिका सामने आई है। विजिलेंस जांच में पता चला है कि डीआरओ, नायब तहसीलदार और अन्य अधिकारियों ने मिलीभगत कर ट्रस्ट की 22 बीघा 14 बिस्वा बेशकीमती जमीन का झूठा इंतकाल एक फर्जी व्यक्ति के नाम पर दर्ज करा दिया। उसके बाद मोहाली निवासी एक व्यक्ति के नाम जमीन ट्रांसफर कर दी।
बिल्डिरों से मिलकर उस जमीन को बेचने की कोशिश की गई और कई लोगों से बयाना भी ले लिया गया, लेकिन इस दौरान ट्रस्ट को इस डील का पता चल गया। ट्रस्ट ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर इसकी जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके बाद सरकार ने जांच विजिलेंस को सौंप दी।
विजिलेंस ने इस मामले में तत्कालीन डीआरओ जीएस विर्क, तत्कालीन नायब तहसीलदार नरेंद्र राणा, सदर कानूनगो सुरेंद्र सिंह, फील्ड कानूनगो अरुण दत्त, नायब सदर कानूनगो राजबीर सिंह, पटवारी राकेश कुमार, सुखविंदर सिंह, कुलजीत सिंह, जगतार सिंह, अश्विनी भारद्वाज निवासी अंबाला, संजीव कुमार और सूरजपाल निवासी यमुनानगर के खिलाफ 419, 420, 467, 471 व 120 बी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच अधिकारी डीएसपी निहाल सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद तफ्तीश जारी है और टीमें काम कर रही हैं।
मामले के मुताबिक राजस्व रिकार्ड में ट्रस्ट के प्रबंधक रूप लाल जैन पुत्र शोभा राम जैन के नाम संस्था की जमीन दर्ज थी। आरोपी अधिकारियों ने मिलीभगत कर जमीन पहले रामलाल पुत्र सीनू राम (फर्जी) के नाम कर दी। उसके बाद साल 2006 में सुखविंदर पुत्र वसन सिंह निवासी सेक्टर-68 मोहाली ने रामलाल से यह जमीन अपने नाम करवा ली। फर्जी व्यक्ति के नाम जमीन ट्रांसफर से लेकर सुखविंदर को जमीन बेचने तक में पूर्व डीआरओ और नायब तहसीलदार ने सक्रिय भूमिका निभाई।
ऐसे खुला मामला
बेशकीमती जमीन अपने नाम करवाने के बाद सुखविंदर सिंह ने पंचकूला की एसीजेएम की अदालत में एक याचिका दायर कर अपील की कि उसे श्री जेनेंद्रा गुरुकुल ट्रस्ट की जमीन का मालिक घोषित कर दिया जाए। जब यह बात पब्लिक डोमेन में सामने आई तो ट्रस्ट को इस बारे में पता चला। अपनी जमीन जाते देख संस्था की ओर से अदालत में अर्जी दी गई और वइ इस मामले में पार्टी बन गई। उसके बाद विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी। इस मामले में घपलेबाजी का शक इस बात से भी बढ़ जाता है कि जैन व्यक्ति ही संस्था का सदस्य बन सकता है, लेकिन उसे किसी भी जमीन के वसीयत करने का अधिकार नहीं होता।


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