11 साल पुरानी जनसंख्या पर वार्ड बंदी

Panchkula Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। नगर निगम वार्ड बंदी की तैयारी में है। एडहॉक कमेटी की एक बैठक हो भी चुकी है। कुछ ही दिन में वार्ड बंट भी जाएंगे। ताज्जुब है कि निकाय विभाग खुद ही अपने नियमों को बदलने पर उतारू है। हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 के सेक्शन छह के मुताबिक लेटेस्ट जनगणना के मुताबिक ही वार्डों का गठन होना चाहिए। लेटेस्ट जनगणना 2011 में हुई थी। निगम की दलील है कि अब तक इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाए हैं, इसलिए साल 2001 की जनगणना के आधार पर वार्ड बंदी की जा रही है। लिहाजा, आबादी बढ़ने के बावजूद वार्डों की संख्या कम कर दी गई। अब कुल 20 ही वार्ड रहेंगे, जबकि नगर परिषद के दौरान 31 वार्ड थे। इसके अलावा कालका नगर पालिका, पिंजौर नगर पालिका और 42 पंचायतों का भी समावेश कर दिया गया है।
डोर-टू डोर करवाया था सर्वे
बताया जा रहा है कि जब 2011 की जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाए तो निकाय विभाग की ओर से डोर-टू-डोर सर्वे कराया गया, ताकि आबादी का सही आकलन हो सके। इस सर्वे के मुताबिक नगर निगम की कुल आबादी करीब तीन लाख 70 हजार निकलकर आई है। हालांकि इस सर्वे के बारे में कई लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि एजेंसी ने सिर्फ खाना-पूर्ति की है। कई लोगों के घर पर सर्वे ही नहीं हो पाए। निकाय विभाग ने भी इन्हीं सर्वे को प्रमाणित मान लिया और इसी के आधार पर आकलन लगा लिया कि आबादी चार लाख से कम है। यदि आबादी इसके ऊपर होती तो वार्डों की संख्या बढ़ती। निगम अधिकारियों की दलील है कि सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ है।
विकास पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले पंचकूला नगर परिषद में 31 वार्ड थे। इसके अलावा कालका के 17 वार्ड, पिंजौर के 15 वार्ड और 42 पंचायत भी इसमें जोड़ दी गई हैं। साल 2001 की जनसंख्या के आधार पर अब सिर्फ 20 वार्ड ही रह गए हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो कालका के हिस्से में सिर्फ दो ही वार्ड आ रहे हैं। ऐसे में जहां पर पहले 17 पार्षद जनता के प्रतिनिधि के रूप में काम देखते थे। अब दो पार्षदों को ही देखना होगा। जाहिर सी बात है कि इसका खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ेगा।
क्या कर सकता है निकाय विभाग
विशेषज्ञों के अनुसार निकाय विभाग चाहता तो साल 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों का इंतजार कर सकता था। उम्मीद जताई जा रही है दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक इसके आंकड़े भी आ जाएंगे, लेकिन विभाग जल्दबाजी में जुटा हुआ है। यदि 2011 के आंकड़ों के मुताबिक ही वार्डों का गठन किया जाए तो सीधे तौर पर वार्ड बढ़ेंगे। वार्ड बढ़ेंगे तो इसका फायदा जनता को ही होगा।
कांग्रेसी पार्षद मिले थे मुख्यमंत्री से
इस मामले को लेकर कुछ दिन पहले पंचकूला के कांग्रेेसी पार्षदों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और वार्डों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई। पार्षदों ने मांग रखी कि पंचकूला नगर निगम में कम से कम 40 वार्ड तो होने चाहिए, जिससे लोगों को ही फायदा हो। इस बारे में मुख्यमंत्री ने भी आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस मामले का समाधान निकालेंगे।
कोट
इस बारे में मुख्यमंत्री और निकाय विभाग को ज्ञापन सौंप चुका हूं। वार्ड बंदी साल 2011 की आबादी के मुताबिक ही होनी चाहिए। यदि जल्द ही ऐसा नहीं हुआ तो इस मामले में अदालत का सहारा लेना पड़ेगा।
विजय बंसल, इनेलो नेता और आरटीआई कार्यकर्ता

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