सीबीआई ने आनंद प्रकाश के दावे को गलत बताया

Panchkula Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। रुचिका के पिता एससी गिरहोत्रा से उनकी बेटी के पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर की जालसाजी और आशु को हिरासत में यातनाएं देने के मामले में सीबीआई की दाखिल क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ आनंद प्रकाश की अपील पर वीरवार को जांच एजेंसी ने सीबीआई की अदालत में अपना जवाब दायर कर दिया। सीबीआई ने आनंद प्रकाश के दावों को खारिज करते हुए कहा कि क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते वक्त थर्ड पार्टी को नोटिस नहीं दिया जाता। जांच एजेंसी को सिर्फ शिकायतकर्ता और पीड़ित को ही नोटिस जारी करने का अधिकार है। इस मामले पर बहस अब पांच नवंबर को होगी।
सीबीआई ने दोनों ही मामलों में साल 2010 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। रुचिका के पिता एससी गिरहोत्रा और भाई आशु गिरहोत्रा ने कोई भी आपत्ति नहीं दर्ज की। एक जून को सीबीआई की निचली अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ आनंद प्रकाश ने अदालत में अपील दायर की थी। उनका कहना था कि वे भी इस मामले में शिकायतकर्ता थे, लेकिन सीबीआई ने उनका पक्ष जाने बिना क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। याद रहे कि रुचिका ने 28 दिसंबर, 1993 को आत्महत्या कर ली थी। सुनवाई के दौरान एसपीएस राठौर की ओर से उनके एडवोकेट अजय कौशिक पेश हुए।

आशु गिरहोत्रा के मामले में आनंद को सीबीआई का जवाब
आशु गिरहोत्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी एसपीएस राठौर के इशारे पर उस पर वाहन चोरी के झूठे मामले दर्ज किए गए। साथ ही पुलिस ने सेक्टर छह की मार्केट में हाफ नेकर में उसकी परेड कराई थी।
1. शिकायत पत्र में सिर्फ हस्ताक्षर कर देने से कोई शिकायतकर्ता नहीं बन सकता।
2. शिकायतकर्ता को ही क्लोजर रिपोर्ट का नोटिस दिया जा सकता है।
3. गवाह और पड़ोसी विजय धीर के मुताबिक आशु को 25 दिसंबर 1992 में हाफ नेकर में मार्केट में घुमाया गया। जांच में सामने आया कि इस दिन आशु पुलिस की कस्टडी में था ही नहीं। इसके अलावा न तो मार्केट के किसी व्यापारी ने यह दृश्य देखा और न ही किसी पड़ोसी ने। इस बारे में मार्केट के सभी व्यापारियों से पूछताछ की गई।
4. आशु और उसके पिता ने कभी भी किसी दवाब के बारे में कुछ नहीं कहा।

हस्ताक्षर के जालसाजी में आनंद को सीबीआई का जवाब
एससी गिरहोत्रा का आरोप था कि रुचिका की मौत के बाद खाली कागजात पर उनसे हस्ताक्षर करवाकर उनकी बेटी की पोस्टमार्टम की औपचारिकताओं को पूरा कर दिया गया। साथ यह भी आरोप लगा था कि उनकी बेटी के नाम को जानबूझकर रूबी और एससी गिरहोत्रा के नाम को सुभाष चंद में बदल दिया गया।
1. जांच एजेंसी ने सभी एंगल से जांच की, लेकिन राठौर के खिलाफ कोई भी सुबूत नहीं मिला।
2. रुचिका की ओर से कभी भी पुलिस स्टेशन या एसडीएम को शिकायत नहीं दी गई।
3. गिरहोत्रा ने पुलिस, डाक्टर और पीजीआई के क्लर्क को जो बातें लिखवाईं, उस पर कोई भी जाली हस्ताक्षर नहीं किए।
4. गिरहोत्रा ने क्लोजर रिपोर्ट के दौरान कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं की। साथ ही किसी भी दबाव की बात नहीं की।

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