हरे-भरे जंगलों का दायरा निरंतर कम हो रहा

Panchkula Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
मोरनी। शिवालिक क्षेत्र के मोरनी खंड के जंगलों को वन विभाग की गलत बांट के चलते खनन, आग व तस्करी आदि से भारी नुकसान हो रहा है। शिवालिक के हरे-भरे जंगलों का दायरा निरंतर कम होता जा रहा है। इससे पर्वतीय इलाके के बुद्धिजीवियों और पर्यावरण प्रेमियों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। उनका सुझाव है कि यदि जंगलों को वन मंडल हेडक्वार्टर से दूरी को ध्यान में रखकर रेंजों में बांटा जाए तो आग, खनन, हरे पेड़ों के कटान, तस्करी और अन्य नुकसान पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। यहां के जंगल के एक बडे़ हिस्से को रायपुररानी, पंचकूला, और पिंजौर वन रेंजों मे मिला दिया गया है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस बांट के बाद मोरनी के जंगलों पर दूसरी रेंजों का पूरा ध्यान भी नहीं है। यही वजह है कि अवैध खनन, कब्जे दिनों दिन बढ़ रहे हैं। वहीं, दूरी का लाभ उठा कर थापली नदी और टिक्करतालों में धड़ल्ले से खनन चल रहा है।
मोरनी के जंगलों के हिस्से पर बांट के बाद 30 से 35 किमी दूर रायपुररानी, पिंजौर और पंचकूला वन रेंज का अधिकार है। वहीं, वन अफसरों के दूर बैठने से वन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। मोरनी क्षेत्र के महज 15 से 20 किमी के दायरे में पड़ने वाले टिक्करताल, पलासरा और बणी के जंगलों को मोरनी की बजाय रायपुररानी से जोड़ा गया है। अगर कोई जरूरत पड़ती है तो जब तक अधिकारी पहुंचते हैं माफिया फरार हो जाते हैं। इसी तरह पिंजौर वन रेंज में पड़ने वाले मांधना, थापली और चंडी के जंगलों में वन माफिया सक्रिय हैं। मौजूदा समय में टिक्करताल, थापली नदी और मांधना के आसपास के जंगलों में जमकर खनन हो रहा है।
जंगलों के अंधाधुंध कटान और घटते दायरों को लेकर पंचायती नुमाइंदों और वन प्रेमियों में पिंजौर, पंचकूला, रायपुररानी वन रेंजों से नजदीकी जंगलों को काटकर मोरनी वन रेंज में मिलाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। हिन्द संग्राम परिषद के जिला उपप्रधान विनोद कुमार, इंटक के प्रदेश प्रधान महासचिव धर्मपाल शर्मा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य सुरेन्द्र, पंचायत समिति के पूर्व उपाध्यक्ष अमित शर्मा आदि ने कहा कि वह जल्द ही वन मंत्री हरियाणा से मिलेंगे। लोगों ने बताया कि उनके क्षेत्र का खंड विकास कार्यालय, जन स्वास्थ्य कार्यालय, खंड शिक्षा विभाग कार्यालय, उपतहसील सहित पुलिस चौकी मोरनी में पड़ती है। उनका पूरा क्षेत्र ही मोरनी खंड और राजस्व का हिस्सा है मगर वन रेंज को मोरनी की बजाय दूसरे खंडों में पड़ने वाली वन रेंजों का हिस्सा बना दिया गया।
पंचायत समिति उपाध्यक्ष जय कुमार, किसान मजदूर खेत कांग्रेस के ख्ंाड प्रधान डा. हरमेश ने बताया कि हमेशा से बणी, टिक्करताल, प्लासरा आदि के जंगल मोरनी का हिस्सा रहे हैं मगर वन विभाग ने इन क्षेत्रों को 30 से 35 किमी दूर वन रेंज रायपुररानी में शामिल कर रखा है, जबकि मोरनी वन रेंज के यह सारे क्षेत्र 10 से 15 किमी में पड़ते हैं। अगर आगजनी सहित कोई बड़ी घटना हो जाए तो रायपुररानी, पिंजौर या पंचकूला से विभाग को यहां पर पहुंचने में 4 से 5 घ्ंाटे लग जाते हैं मगर मोरनी वन रेंज से यहां मात्र 20 से 25 मिनट ही लगते हैं। दूसरी तरफ वन विभाग से जुड़ा छोटे से छोटा कार्य करवाने में लोगों को रायपुररानी, पिंजौर और पंचकू ला जाने में 100 से 200 रुपये किराया खर्च करना पड़ता है। किसान राजपाल, महेंद्र, कर्मचंद, करण, लेख राज आदि ने बताया कि झाड़ सफाई जैसे छोटे से छोेटे कार्य को करवाने के लिए काफी ज्यादा किराया और सारा दिन खराब करना पड़ता है।

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