ढाई दर्जन स्टॉपों पर बस क्यू शेल्टर नहीं

Panchkula Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
मोरनी। बस पकड़ने के लिए दुर्गम पहाड़ी इलाके से कई किलोमीटर पैदल चलकर आने वाले ग्रामीणों को कंडेरन से पंचकूला तक रास्ते में पड़ने वाले करीब ढाई दर्जन बस स्टॉपों पर गर्मी, सर्दी हो या बरसात खुले आसमान के नीचे ही बसों की बाट जोहनी पड़ती है। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला द्वारा मुख्य बस ठहरावों पर वर्षा शालिकाएं बनाने की घोषणा के बावजूद आज तक मोरनी में दो ही बस ठहराव बन पाए हैं। मोरनी-रायपुररानी मार्ग पर भी बारिश, सर्दी और धूप में यात्रियों क ो खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बसों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। मांधना गांव में बना बस स्टॉप कई साल पहले ढह गया था मगर आज तक दोबारा नहीं बन पाया। मोरनी-रायपुररानी मार्ग पर भी बसों के करीब ढाई दर्जन ठहराव हैं। याद रहे कि मोरनी और भूडी को छोड़ कर किसी भी अन्य बस ठहराव पर शालिका नहीं है। इसके साथ ही बसों के आवागमन की समय सारणी भी अंकित नहीं है इस वजह से भी कई बार यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। पंचकूला और रायपुररानी जाने के लिए पहले कई-कई किलोमीटर पैदल चलना फिर धूप, गर्मी, सर्दी और बारिश में सड़कों के किनारे खडे़ होकर घंटों बसोें के इंतजार से लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि सरकार के नुमाइंदे उनका सिर्फ वोट बैंक समझकर शोषण करती आ रही है। अब नए चले रूटों मोरनी से टिक्करताल, मोरनी से बड़ीशेर और मोरनी से थापली-पंचकूला पर तो कहीं खड़े होने की जगह भी तय नहीं है।
दैनिक यात्री राजपाल, हरदयाल, तपेंदर, रघुवीर, हंसराज प्लासरा आदि ने बताया कि बसों के इंतजार में लोगों को आए दिन परेशानी उठानी पड़ती है। बच्चों, पारिवारिक सदस्यों, बुजुर्गों और स्कूली छात्रों को कड़ाके की सर्दी और बारिश में वर्षा शालिकाओं के बिना ठिठुरते और भीगते देखा जा सकता है। बसों की समय-सारणी नहीं अंकित होने से चालक मनमाने ढंग से बसाें को चला रहे हैं। उधर, मोरनी में लगी समय सारणी भी लोगों के लिए परेशाी का कारण बनी हुई है। लोगों ने यहंा प्रमुख बस ठहरावों पर वर्षा शालिकाओं के निर्माण की मांग की है। मोरनी पंचायत संगठन ने भी मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को प्रस्ताव पास कर भेजा है।
बिना क्यू शेल्टर के स्टेशऩ
नीमवाला, कंडेरन, मोहड़ी, बड़याल, नालाघाट, शेरलाताल, खुड़ली पीपल, चमखा, बैहलो, उडयो, टिकरी, दपाना, थाना, खेड़ाबागड़ा, मांधना आदि में शेल्टर न होने से लोगों को परेशानी हो रही है। इनमें हर स्टेशन से रोजाना करीब 45 से 50 सवारियां बसें पकड़ती हैं। रायपुररानी रूट पर भी कमोबेश यही स्थिति है।

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