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जनगणना फार्म के कालम में गड़बड़ी से हड़कंप

Panchkula Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। हरियाणा में आर्थिक और जातिगत आधारित जनगणना के फार्म के कॉलम में हुई गड़बड़ी ने कई अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। इस गड़बड़ी के कारण जनगणना की प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 80 हजार 461 बंधुआ मजदूर हैं। यहीं नहीं करीब 72 हजार आदिवासी और करीब 70 हजार मैला ढोने वाले हैं। इसने जनगणना विभाग के उन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं जिसमें कहा गया है कि हरियाणा में एक भी मैला ढोने वाला व्यक्ति नहीं है और न ही कोई बंधुआ मजूदर। अब अपनी साख बचाने के लिए विभाग ने फिर से जनगणना रिपोर्ट को प्रदेश के सभी जिलाें में भेज दिया है ताकि इस पर आपत्तियां दर्ज करवाकर असलियत सामने लाई जा सके। इस रिपोर्ट से लाखों रुपये खर्च करके करवाई गई जनगणना पर ही सवाल उठने लगे हैं।
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ट्रेनिंग वर्कशाप पर फिरा पानी
बीते साल नवंबर में हरियाणा में आर्थिक और जातिगत जनगणना शुरू हुई। आधुनिक संसाधनों की सहायता से करीब तीन महीने के अंदर पूरे प्रदेश की जनगणना पूरी हो गई। सर्वे में सरकारी टीचरों और कंप्यूटर आपरेटर की मदद ली गई। बाकायदा इसके लिए लाखों रुपये खर्च करके ट्रेनिंग वर्कशॉप भी चलाई गई। उसके बाद हर ग्राम पंचायत और वार्ड से आई ड्राफ्ट लिस्ट को प्रिंट कराया गया। जब यह रिपोर्ट जनगणना विभाग के पास पहुंची थी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

आपत्तियां दर्ज करवाने को 21 दिन का समय
जिला प्रशासन ने जनगणना की प्रिंटेड ड्राफ्ट लिस्ट सभी ग्राम पंचायत, नगर निगम और परिषदों को भेज दी है। प्रशासन की ओर से सभी व्यक्तियों को 21 दिन का समय दिया गया है। यदि उनके नाम के सामने बंधुआ मजदूर या मैला ढोने वाला लिखा है तो आपत्ति दर्ज करवाई जा सकती है। शहर में यह लिस्ट सेक्टर के कम्युनिटी सेंटर या नगर निगम के कार्यालय में है, जबकि गांव में पंचायत के पास।

बंधुआ मजदूर कॉलम में यहां हुई गड़बड़ी
जनगणना प्रोफार्मा में एक कॉलम के तहत यह जानकारी मांगी गई थी कि आप कभी बंधुआ मजदूर थे और कानूनी रूप से मुक्त हुए हैं या नहीं। जिन लोगों ने इस कॉलम में जवाब ‘नहीं’ में दिया तो विश्लेषकों ने उसे यह मान लिया कि वे अभी तक बंधुआ मजदूर हैं। इसी आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर दी गई। वहीं, मैला ढोने वाले और आदिवासी जनजाति से संबंधित कॉलम को भरने में कहां चूक हुई यह भी जांच का विषय है।

कोट
यह फाइनल रिपोर्ट नहीं है। अभी ड्राफ्ट प्रिंट होकर आए हैं। लोगों से आपत्तियां मांगी गई हैं। जो भी गलत आंकड़े आए हैं, उन्हें ठीक करवाया जा रहा है।
- वीके बब्बर, ज्वाइंट डायरेक्टर, जनगणना विभाग।

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