डिब्बा बंद दूध के प्रचार पर रोक

Panchkula Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। डिब्बा बंद दूध का प्रचार करने वाली कंपनियों के खिलाफ खाद्य एवं औषधि विभाग ने शिकंजा कसने की तैयार कर ली है। इसके लिए बकायदा एक टीम तैयार की गई है, जो डिब्बा बंद दूध का प्रचार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। प्रदेश के कई जिलों में इस पर कार्रवाई चल रही है। पानीपत और रोहतक में कई कंपनियों में छापों के अलावा सैंपलिंग भी की गई है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान के पीछे विभाग का मकसद है कि कंपनियां डिब्बा बंद दूध का प्रमोशन न करे, ताकि स्तनपान को बढ़ावा मिल सके।
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अगस्त के पहले सप्ताह में पूरे हरियाणा में स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान प्रदेश में कई जगह खाद्य एवं औषधि विभाग की ओर से वर्कशॉप आयोजित की गई। वर्कशॉप के जरिए पता चला कि इन डिब्बा बंद दूध के लिए एक एक्ट बनाया गया है, जिसका कंपनियां वाइलेशन कर रही हैं। इसी वजह से माडर्न महिलाएं स्तनपान की जगह नवजातों को डिब्बा बंद दूध पिला रही हैं। कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए विभाग ने इनफैंट मिल्क सब्टीट्यूट एक्ट 1992 को फिर से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि यह एक्ट पहले था, लेकिन इसकी ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
स्टेट ड्रंग कंट्रोलर जीएल सिंघल ने बताया कि एक्ट को सख्ती से लागू करने के लिए विभाग के अफसरों को कई तरह के निर्देश दिए गए हैं। पिछले दिनों रोहतक और पानीपत में छापेमारी भी हुई है। यहां पर कई कंपनियों के सैंपल लिए गए हैं। इनके परिणाम एक हफ्ते के भीतर आ जाएंगे। उसके बाद कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस एक्ट के तहत डिब्बा बंद दूध का प्रचार नहीं करना है।
एक्ट में यह हैं प्रावधान
1. दूध के पैकेट या डिब्बे में मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार का स्लोगन लिखा होना चाहिए।
2. हेल्थ वर्कर की सलाह के बिना दूध को नहीं बेचा जा सकता।
3. पैकेट या डिब्बे में मां या बच्चे की फोटो नहीं होनी चाहिए।
4. बिक्री को बढ़ावा देने के लिए कोई भी प्रमोशन नहीं होना चाहिए।

यह हो सकती है कार्रवाई
एक्ट के उल्लंघन में विभाग का अधिकारी सभी डिब्बा बंद दूध को अपने कब्जे में ले सकता है। इसके अलावा शून्य से तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
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