वकीलों ने उठाई यूनिवर्सिटी की मांग

Panchkula Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। शहर में यूनिवर्सिटी निर्माण की मुहिम में एडवोकेट भी जुड़ गए हैं। वकीलों ने एक सुर में कहा कि शहर में यूनिवर्सिटी की स्थापना अहम है। पंचकूला शहर की अब आबादी बढ़ चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों की भी जनसंख्या बढ़ रही है। दूसरी तरफ पीयू पर भी बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे मेें सरकार को इस मामले में जल्द से जल्द से सोचना चाहिए और सरकारी यूनिवर्सिटी के निर्माण की ओर से कदम बढ़ाए। इससे शहर ही नहीं बल्कि अंबाला, पंजाब और हिमाचल के विद्यार्थियों को काफी सहूलियत होगी। इसके अलावा इस क्षेत्र के पिछड़े इलाकों में बदलाव की बयार देखी जा सकेगी।
कोट
पंचकूला की पहचान प्रदेश और प्रकृति में अलग है। सभी जिलों से यह शहर सबसे खूबसूरत है। यहां शांति और सुकून है। शिक्षा के लिए इससे बेहतर क्या माहौल होगा, लेकिन बदकिस्मती से यहां पर कुछ भी नहीं है। न तो प्रोफेशनल कालेज हैं और न ही यूनिवर्सिटी, जबकि अन्य शहरों में कई यूनिवर्सिटी खोली जा रही हैं तो पंचकूला इस विशेषाधिकार से क्यों वंचित रहे?
-चंदर सिंह कौशिक, वरिष्ठ एडवोकेट हाईकोर्ट
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शहर के विकास के लिए शिक्षा का अहम स्थान होता है। यदि शिक्षा नहीं होगी तो न तो शहर आगे बढ़ेगा और न ही मनुष्य। पंचकूला एक हाईप्रोफाइल शहर है। सरकार को तो इस शहर को एजूकेशन हब के नाम से डेवलप करना चाहिए। यूनिवर्सिटी के साथ-साथ प्रोफेशनल कालेज भी होने चाहिए।
-जगपाल सिंह, एक्स प्रेसिडेंट बार एसोसिएशन, पंचकूला
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पंचकूला शहर तेजी से विकास कर रहा है। यहां पर गवर्नमेंट कर्मचारी काफी संख्या में रहते हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों को चंडीगढ़ या कुरुक्षेत्र में भेजना काफी मुश्किल होता है। प्राइवेट में फीस इतनी ज्यादा है कि उनके लिए काफी मुश्किलें आती हैं। इसलिए पंचकूला में यूनिवर्सिटी का निर्माण बहुत जरूरी है।
-अमित डुडेजा, एडवोकेट पंचकूला
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कालका और पिंजौर के काफी ऐसे विद्यार्थी हैं जो विश्वविद्यालय या प्रोफेशनल कालेज नहीं होने के कारण आगे की पढ़ाई जारी नहीं कर सके। मेरे परिवार के कई लोगों को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में भी सोचना चाहिए। पंचकूला मेें यूनिवर्सिटी का होना बहुत जरूरी है।
-यज्ञदत्त शर्मा, एडवोकेट पंचकूला
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शहर में प्रोफेशनल कोर्सों की स्थिति तो न के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइवेट प्रोफेशनल कालेज खुल गए हैं। इनकी फीस इतनी ज्यादा है कि लोग अपने बच्चों का इसमें एडमिशन नहीं करवा पाते। सरकार को जल्द से जल्द इस क्षेत्र के लिए यूजीसी ग्रांट वाली यूनिवर्सिटी खोले।
-सतीश कादियान, प्रेसिडेंट, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन

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