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गोताखोरों ने चारों शव निकाले

Panchkula Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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मोरनी। टिक्करताल में रविवार दोपहर बाद डूबे चार युवकाें के शवों को फायर विभाग और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के दर्जन भर से अधिक गोताखोराें ने स्थानीय गोताखारों की मदद से करीब 24 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सोमवार सायं चार बजे निकाल लिया। गोताखोर संसाधनों की कमी के बावजूद किसी तरह चारों शवों को निकालने में सफल रहे। स्थानीय प्रशासन के नायब तहसीलदार रूपिंदर रूबी, खंड विकास अधिकारी ईश्वर सिंह, मोरनी चौकी इंचार्ज परमजीत मंड, पर्यटन निगम प्रभारी रंजन अरोड़ा की देखरेख में स्थानीय गोताखोरों की शवों को ढूंढने में अहम भूमिका रही।
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रविवार देर रात घटनास्थल पर पहुंचे गोताखोराें के दल ने सोमवार सुबह 6 बजे शवों को ढूंढने का अभियान शुरू किया। इसके बाद स्थानीय गोताखोर भी दल के सहयोग में शामिल हो गए। सोमवार को पहला शव 8.35 बजे मिला। फिर उसके ठीक 20 मिनट के बाद दलदल में फंसे दूसरे युवक का शव मिला। इसके पश्चात कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के बचाव दल के इंचार्ज राजेश हुड्डा के नेतृत्व में दल के सदस्य कुलदीप सिंह, राम सिंह, मदन लाल, धूप सिंह, नफे सिंह और फायर ब्रिगेड पंचकूला के एक्सपर्ट तैराक जयदेव मलिक, सुरेंदर, कर्मजीत, तरसेम, राजेश और दीपक के साथ स्थानीय तैराक दीप राम, धर्मपाल, कृपा राम, निर्मल, खेमराज, महेंदर व नारायण दत्त आदि कोे दोपहर एक बजे बारिश आने क ी वजह से सर्च अभियन को रोकना पड़ा।
उसके बाद दोपहर तीन बजे बचाव दल ने दोबारा सर्च अभियान शुरू किया और शव की खोजबीन जारी की। स्थानीय गोताखोर तैराक जयदेव मलिक के साथ तकरीबन चार बजे पहले दो शवों के मिलने वाले स्थान से कुछ दूरी पर गहराई में कंाटे की मदद से अंतिम व चौथे शव को निकालने में सफल रहे।
विचित्र स्थिति उस समय उत्पन्न हो गई जब मौके पर मौजूद संदीप के परिजनों ने संदीप का शव होने से इंकार कर दिया। हालांकि संदीप के चाचा मुरारी लाल और भाई प्रदीप सुबह से बैठे थे।
उल्लेखनीय है कि रविवार को सायं 6 बजे जतिन का शव निकाला गया था। सोमवार सुबह 8.35 बजे निकाले गए शव की पहचान जसविंदर के रूप में हुई। इसके बीस मिनट बाद जो शव निकाला गया उसकी पहचान अनूप के रूप में उनके-उनके परिजनों द्वारा की गई।
मोरनी पुलिस ने चौथे युवक के मौके से मिले मोबाइल से उसके भाई प्रदीप से फोन पर बात की तो उसने बताया कि उसका भाई संदीप पुत्र नारायण लाल पंचकूला के मकान नंबर 833, सेक्टर-19 सेक्टर का निवासी है, जो अपने दोस्तों के साथ रविवार को घूमने गया था। चार युवकों के झील में डूबने क ी सूचना पर भाई प्रदीप और चाचा मुरारी लाल घटनास्थल पर पहुंचे।
इस दुखद घटना पर मौके पर मौजूद जिला परिषद की सदस्य एवं महिला कांग्रेस की खंड प्रधान बिमला ठाकुर, इंटक के प्रदेश प्रधान धर्मपाल शर्मा, टीका सिंह, अध्यापक संघ 70 के प्रदेश प्रवक्ता हरप्रीत शर्मा, सर्व कर्मचारी संघ के नेता कृष्णपाल आदि ने शोक प्रकट करते हुए सरकार और प्रशासन से यहां पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस प्रबंध करने की मांग की।

ख्वाजा (जल देवता) को मनाया
मोरनी। टिक्करताल में चौथे शव के न मिलने पर स्थानीय निवासियों और गोताखोरों ने परिजनों को ख्वाजा (जल देवता) से प्रार्थना करने को कहा। इसके आधे घंटे बाद शव मिल गया। गौरतलब है कि गत वर्ष भी जब तीन दिनों तक झील में डूबे शव को नहीं निकाला जा सका था तो परिजनों ने जल देवता को मनाया था।


आला अधिकारी नहीं पहुंचे टिक्करताल
मोरनी। टिक्करताल में चार युवकों की मौत की खबर पाकर भी जिले से कोई आला अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। वहीं, पर्यटन निगम के आला अधिकारी भी कन्नी काटते नजर आए। स्थानीय प्रशासन में नायब तहसीलदार मोरनी, बीडीपीओ और पर्यटन निगम के स्थानीय प्रभारी रंजन अरोड़ा ही मौजूद रहे। इसके अलावा पुलिस का कोई आला अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा। चंडीमंदिर थाने से नरेंदर सिंह और मोरनी चौकी इंचार्ज परमजीत सिंह ही मौजूद रहे।

साजो-समान के अभाव में गोताखोर दिखे असहाय
मोरनी। टिक्करताल में घटना के बाद घटनास्थल पर प्रशासन ने एक दर्जन गोताखोरों को तो भेज दिया, लेकिन साजो-समान के अभाव में गोताखोर असहाय रहे। इनके पास न तो लोहे के कांटे, न मोटरबोट और न ही कोई जाल था। गोताखोरों ने स्थानीय गोताखोर के साथ मिलकर अपने स्तर पर प्रबंध किया। तारों के जाल और लोहे के सरिये की मदद से शवों को ढूंढने का काम शुरू हुआ। बचाव दल के सदस्यों का कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें साजो-सामान नहीं उपलब्ध करवाया जा रहा। इससे उनकी जान को भी जोखिम की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।


चेतावनी बोर्ड लगाकर निभाई जा रही जिम्मेदारी
मोरनी। टिक्करताल में लोगों के डूबने का यह कोई पहला मौका नहीं है। पर्यटन निगम ने ताल में बोटिंग के नाम पर लाखों रुपये का टेंडर तो दे दिया मगर आज तक न तो तालों की अपनी कोई बाउंड्री की सीमा तय कर बाड़ लगवाई गई और न ही बोटिंग के लिए कोई लाइफ गार्ड ही तैनात किया गया। तालों में बोटिंग करवाने वाली कंपनियां भी लाइफ गार्ड के बिना ही बोटिंग करवा कर रही हैं। निगम के पास न तो किसी हादसाग्रस्त को प्राथमिक चिकित्सा दिलवाने का क ोई प्रबंध है और न ही आपातकाल में किसी बोटिंग के हादसे की सूरत में कोई प्रबंध है। गत वर्ष 18 जून को पंचकूला के सेक्टर-14 का एमबीए पास युवक नीरज मणि भी ताल में डूब गया था। इससे पहले नाडा गंाव का एक युवक भी ताल में डूब चुका है। गौरतलब है कि करीब हर वर्ष यहां पर ऐसे हादसे होते रहते हैं और पर्यटन निगम ने केवल एक चेतावनी बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेवारी से इतिश्री कर ली है।

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