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जतिन नहीं उतरना चाहता था झील में

Panchkula Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। ढकौली में रहने वाला जतिन टिक्करताल की झील में नहीं उतरना चाहता था। संदीप, जसविंदर और अनूप तीनों झील में मस्ती कर रहे थे। जतिन झील के तट पर ही बैठकर तीनों की अठखेलियां देख रहा था। तीनों ने बार-बार जतिन को कहा कि तू भी झील में आ जा। खूब मजा आ रहा है। कई बार कहने के बाद जतिन भी झील में उतर गया, लेकिन वह किनारे ही तैरता रहा। यह कहना है वन विभाग के मजदूरों का। उन्होंने बताया कि तीन युवक पहले ही झील में कूद गए थे। उन्होंने रविवार शाम जतिन की लाश को पहचान लिया था।
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मजदूरों ने रोका था
टिक्करताल के किनारे पहुंचकर चारों युवक हुड़दंग कर रहे थे। इसकी सूचना मिलने पर वन विभाग की ओर से काम कर रहे मजदूरों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन युवकाें ने मजदूरों के साथ अभद्र व्यवहार किया और दोबारा से हुड़दंग करने लग गए। युवकों की ओर डांट लगाए जाने पर मजदूर डर गए।
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जतिन का शव खड़ा मिला
ताल में उतरे गोताखोरों को शवों की तलाश करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। रविवार को गोताखोरों ने सबसे पहले जतिन का शव निकाला। पुलिस को दी जानकारी में गोताखोरों ने बताया कि जतिंदर का शव गाद में फंसने के कारण खड़ा हुआ था।
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कहीं दो फुट तो कहीं 40 फुट से अधिक गहराई
गोताखोरों ने बताया कि झील की गहराई की कोई सीमा नहीं है। कहीं यह झील सिर्फ दो फुट गहरी है तो कहीं 40 फुट। चारों युवक पहले किनारे पर थे तो उन्हें लगा कि आगे भी इसकी गहराई इतनी होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। इसी धोखे में वह मारे गए। गहराई में काफी गाद भी है।
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जसविंदर के सहारे निकलने की कोशिश की
जसविंदर की लाश निकाली गई तो उसकी बनियान फटी हुई थी। इससे गोताखोरों ने अंदाजा लगाया कि जब सारे डूबने लगे तो सबसे पहले जसविंदर ने निकलने की कोशिश की। तीनों में से किसी एक ने उसे पकड़कर बाहर आने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ में सिर्फ जसविंदर की बनियान ही आ पाई होगी। बाकी सभी की बनियान सही-सलामत थी।
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पत्नी को फोन पर बताया बेटा ठीक है
जनरल अस्पताल की मोर्चरी में जसविंदर सिंह के शव का पोस्टमार्टम चल रहा था और बाहर उसके पिता बिजेंदर दुखी बैठे थे। उनके रिश्तेदार और स्टाफ के लोग आकर उनको दिलासा दे रहे थे। इसी बीच उनकी पत्नी का फोन आ गया और उन्होंने अपने बेटे का हालचाल पूछा। बिजेंद्र ने फोन पर बताया कि उनका बेटा ठीक है और अस्पताल में दाखिल है। इस पर उनकी पत्नी के पूछने पर की बेटे का कहां कहां चोटें आई हैं, बिजेंद्र भावुक हो गए और उनके आंसू रोके नहीं रुके।
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कुरुक्षेत्र से आए गोताखोर
शवों को निकालने के लिए कुरुक्षेत्र से 6 गोताखोर बुलवाए गए थे। गोताखोर जैसे ही पानी में उतरे, तो कहीं पर पानी सिर्फ दो फुट गथा, तो कहीं पर काफी गहरी खाई थी। गोताखोरों ने पुलिस को बताया कि खाई के अंदर दलदल और काफी ज्यादा गाद भरी हुई थी, ऐसे में युवक उसी में फंस गए होंगे।
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प्रोफेशनल कोर्स की सोच रहे थे युवक
चारों युवक मौज मस्ती करने के साथ ही अपने कैरियर के बारे में भी सजग थे। चारों प्रोफेशनल कोर्स करने की सोच रहे थे। सेक्टर-26 में रहने वाले अनूप ने 12वीं के बाद चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित एसजीजीएस कालेज से बीसीए का फार्म भरा था। वह सेक्टर-11 के एक संस्थान से कंप्यूटर कर रहा था। जसविंदर 12वीं करने के बाद एसजीजीएस से ग्रेजुएशन कर रहा था। जतिन आईटीआई करने के बाद पत्राचार के माध्यम से बीए कर रहा था। संदीप भी खालसा कालेज से बीए कर रहा था।

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