यूनिवर्सिटी नहीं तो पंचकूला का विकास भी नहीं

Panchkula Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। अमर उजाला की मुहिम पंचकूला मांगे यूनिवर्सिटी में शहरवासियों का समर्थन जुटने लगा है। लोगों ने एक सुर में मांग है कि पंचकूला में यूनिवर्सिटी का निर्माण बहुत अहम है, क्योंकि शहर में हायर एजूकेशन नाम की चीज नहीं है। इससे विद्यार्थियों का विकास तो थम रहा है, साथ ही पंचकूला भी पिछड़ रहा है। यदि सरकार ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। शहरवासियों का कहना है कि अमर उजाला ने यूनिवर्सिटी की मांग पर एक आंदोलन छेड़ दिया है। यूनिवर्सिटी बनने से शहर ही नहीं बल्कि नारायणगढ़ तक के विद्यार्थियों का फायदा होगा।
कोट
समाज के विकास के लिए एजुकेशन और हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है। शहर में हायर एजूकेशन के लिए एक विश्वविद्यालय का होना बहुत जरूरी है।
-डा. ओडी शर्मा, रीजनल एजूकेशन आफिसर, केंद्रीय विद्यालय संगठन
कोट
शहर के विद्यार्थियों के लिए हायर एजूकेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार को पंचकूला में एक विश्वविद्यालय खोलना चाहिए। अमर उजाला की ओर से यह सराहनीय प्रयास है।
-एमएस वेदी, रिटायर्ड एयर फोर्स
कोट
शहर में 10वीं के बाद विद्यार्थियों के लिए अच्छी स्टडी के लिए संस्थान तो हैं लेकिन फिर भी उन्हें चंडीगढ़ में एडमिशन लेना पड़ता हैं, ताकि पीयू में उन्हें एडमिशन मिल सके।
-उर्मिला रानी, रिटायर्ड हेल्थ विभाग
कोट
हमारी आवाज को अमर उजाला ने उठाया है। शहर में विश्वविद्यालय नहीं होने से बच्चों ने काफी कुछ खोया। अब तो सरकार को जागना चाहिए।
-बीनू धवन, डांस शिक्षिका
कोट
हरियाणा हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है, लेकिन यहां हायर एजूकेशन के नाम की कोई चीज नहीं है। शहर में यूनिवर्सिटी खुलेगी विद्यार्थियों की काफी समस्या हल हो जाएगी।
-स्वतंत्र मल्होत्रा, रिटायर्ड शिक्षिका
कोट
शहर में विश्वविद्यालय नहीं होने से यहां के विद्यार्थियों को चंडीगढ़ जाना पड़ता है। चंडीगढ़ में 85 प्रतिशत कोटा होने के कारण विद्यार्थियों को प्राइवेट कालेज की ओर रुख करना पड़ता है।
-विजय शर्मा, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर
कोट
सबसे पहले तो मैं अमर उजाला को धन्यवाद देता हूं। यदि अमर उजाला इसी प्रकार की संगोष्ठी यूथ के बीच आयोजित करे तो सरकार जल्द आवाज सुनेगी। पंचकूला में विश्वविद्यालय बहुत जरूरी है।
-हर्ष बंसल, बिजनेस मैन
कोट
यदि हरियाणा के तमाम विभागों के हेड आफिस पंचकूला में हैं तो यहां विश्वविद्यालय क्यों नहीं? इसका जवाब सरकार को जरूर देना चाहिए।
-सत्य प्रकाश कुंद्रा, बिजनेसमैन
कोट
हमारे बच्चे जब 10 वीं पास करते हैं तभी से हमारी चिंता बढ़ जाती हैं। शहर में एजूकेशन का कोई अच्छा विकल्प नहीं है। चंडीगढ़ से बच्चे जब तक घर नहीं पहुंचते तब तक उनकी चिंता रहती है।
-केके मेहता, रिटायर्ड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
कोट
हमारी बेटी देहरादून से पिछले दो वर्ष पहले फिजियोथैरेपी की डिग्री ले चुकी है। देहरादून में काफी रुपया खर्च करना पड़ा। यदि शहर में यूनिवर्सिटी होती तो बेटी को परेशानी नहीं झेलनी पड़ती और उसकी अलग से अहमियत होती।
-सुभाष मनोचा, रिटायर्ड हरियाणा वेयर हासिंग असिस्टेंट मैंनेजर
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शहर में यूनिवर्सिटी नहीं होने से विद्यार्थियों को रोजगार भी नहीं मिल रहा है। यूनिवर्सिटी बनती है तो हजारों युवाओं को नौकरी भी मिलेगी।
-भीम सेन, रिटायर्ड असिस्टेंट ट्रेजरी आफिसर
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पंचकूला की तुलना सरकार पेरिस से करती है, लेकिन बेहतर शिक्षा के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
-सचिन धवन, बिजनेसमैन

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