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यूनिवर्सिटी नहीं होने से पिछड़ रहा पंचकूला

Panchkula Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। शहर में यूनिवर्सिटी की मांग को जबरदस्त समर्थन मिलने लगा है। हर व्यक्ति यही चाहता है कि शहर में सरकारी यूनिवर्सिटी होनी चाहिए। चाहे वह रिटायर्ड अधिकारी हो या फिर रिटायर्ड प्रिंसिपल। यहां तक कि चंडीगढ़ एजूकेशन डिपार्टमेंट के रिटायर्ड अधिकारी भी चाहते हैं कि पंचकूला जैसे बड़े शहर में यूनिवर्सिटी का होना बहुत जरूरी है। लोगों का एक राय में कहना है कि विश्वविद्यालय होने से शहर ही नहीं बल्कि बरवाला, पिंजौर, कालका, मोरनी, नारायणगढ़ और बद्दी जैसे क्षेत्रों के विद्यार्थियों के भाग्य खुल जाएंगे। लोगों ने यह भी कहा कि पंचकूला में सारे हेड आफिस हैं। ताऊ देवी लाल स्टेडियम है। आडिटोरियम है, तो शिक्षा के क्षेत्र में यह शहर क्यों इतना पिछड़ा हुआ है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि वह शहर में सरकारी यूनिवर्सिटी स्थापित करने की दिशा में विचार-विमर्श करे और वर्षों पुरानी मांग को जल्द से जल्द से पूरा करे। वीरवार को अमर उजाला ने सेक्टर-16 की राय जानने की कोशिश की तो सभी ने एक स्वर में कहा कि यूनिवर्सिटी नहीं होने से पंचकूला पिछड़ रहा है। टैलेंटेड विद्यार्थी चंडीगढ़ और अन्य क्षेत्रों में पलायन कर रहे हैं।
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कोट
शहर में पीयू के कई प्रोफेसर रहते हैं। वे भी इस दर्द को महसूस करते हैं। शहर में सब कुछ है, लेकिन यूनिवर्सिटी नहीं। सरकार को इस क्षेत्र को शिक्षा का हब बनाना चाहिए।
-भवनेश, रिटायर्ड प्रोफेसर डीएवी कालेज सेक्टर-10
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कोट
पंचकूला के आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थी आगे पढ़ाई करने के लिए समर्थ नहीं हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वे न तो कुरुक्षेत्र जा सकते हैं और न ही पीयू में एडमिशन ले सकते हैं क्योंकि वहां तो कोटा सिस्टम है।
-एनके कपूर, पूर्व डीजीएम बैंक आफ बड़ौदा
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कोट
यूनिवर्सिटी के निर्माण होने से एक यह भी फायदा होगा कि जो विद्यार्थी पढ़ते नहीं हैं, उनका भी मन पढ़ने में लगने लगेगा। चंडीगढ़ के कोटे से पंचकूला का हर विद्यार्थी परेशान है।
-एसके जोशी, लाइन क्लब पंचकूला इलीट
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कोट
हायर एजूकेशन नहीं होने से विद्यार्थियों को चंडीगढ़ जाना पड़ता है, लेकिन उन्हें ट्रेवलिंग में काफी दिक्कत आती है। प्रदेश में 35 यूनिवर्सिटी है लेकिन पंचकूला में एक भी नहीं है।
-एमएल मलहोत्रा, रिटायर्ड आफिसर एलआईसी
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कोट
यूनिवर्सिटी खुलने से यहां पर कई कालेज खुलेंगे, जिसका फायदा नारायणगढ़ तक के विद्यार्थियों को मिलेगा। हमारे बच्चे यहीं पर रहकर पढ़ेंगे। इससे लोगों की काफी बचत भी होगी।
-आरपी पाहुजा, समाजसेवी व रिटायर्ड अधिकारी
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कोट
शहर के विद्यार्थियों के लिए पंचकूला में हायर एजूकेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार को यहां पर गर्वनमेंट यूनिवर्सिटी बनानी चाहिए। अमर उजाला ने बहुत अच्छा मुद्दा उठाया है।
-सुरेश मलहोत्रा, पूर्व एजीएम, एफसीआई
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कोट
पंचकूला में विद्यार्थी ग्रेजुएशन तो कर लेते हैं, लेकिन पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए उन्हें धक्के खाने पड़ते हैं। यहां पर तो ग्रेजुएट लेवल के कोर्स भी नहीं है, जिसकी डिग्री हासिल करने के बाद उन्हें नौकरी मिल सके।
-एमएल सिंगला, पूर्व बैंक अधिकारी
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कोट
पंचकूला में डिग्री बांटने वाली यूनिवर्सिटी नहीं चाहिए। हमें प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी चाहिए, जिससे बच्चों को नौकरी मिल सके।
-एलएम अग्रवाल, पूर्व डिप्टी मैनेजर, बीएचईएल
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कोट
पंचकूला की स्थिति इतनी खराब है कि यहां पर कोई बीएड कालेज तक नहीं है। सरकारी यूनिवर्सिटी खुलने से बरवाला, मोरनी और नारायणगढ़ का विकास भी तेजी से होगा।
-डा. उपेंद्र शर्मा, रिटायर्ड अधिकारी चंडीगढ़ एजूकेशन डिपार्टमेंट
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कोट
अमर उजाला की मुहिम बहुत अच्छी है। पंचकूला के अन्य लोगों के साथ मैं भी शहर में यूनिवर्सिटी खुलने के समर्थन में हूं। यूनिवर्सिटी बनने के बाद यहां से विद्यार्थी जाएंगे नहीं।
-एसके तनेजा, रिटायर्ड अधिकारी एजूकेशन डिपार्टमेंट
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कोट
मेरे दो बेटे हैं। कालेज या यूनिवर्सिटी नहीं होने से दोनों बेटों को बाहर पढ़ाना पड़ा। मेरे लिए यह काफी मुश्किल था। यदि हायर एजूकेशन की सुविधा होती तो रुपयों की काफी बचत होती। मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह काफी मुश्किल है।
-आरसी पीपल, रिटायर्ड अधिकारी आर्किटेक्ट डिपार्टमेंट
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कोट
अमर उजाला ने जो यह मुद्दा उठाया वह काबिलेतारीफ है। सरकार को यहां पर यूनिवर्सिटी जरूर बनानी चाहिए।
-जीएल नारंग, रिटायर्ड सीनियर आडिट आफिसर, पंजाब
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कोट
यूनिवर्सिटी के कैंपस बनने से विद्यार्थियों का मेंटल लेवल बढ़ जाएगा। कैंपस में जब विद्यार्थी ग्रुप डिस्कशन होगा तो उनके टैलेंट में और निखार आएगा। शोध कार्य बढ़ेंगे। इससे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश को भी फायदा होगा।
-सुभाष पपनेजा, महासचिव, पंचकूला रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन
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कोट
पंचकूला का लिटरेसी रेट अन्य जिलों से ज्यादा है। यहां के बच्चे पढ़ाई में चंडीगढ़ से कम नहीं हैं। रोजाना हजारों बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर चंडीगढ़ जाते हैं। यूनिवर्सिटी बन जाने से चंडीगढ़ का ट्रैफिक काफी कम हो जाएगा।
ओपी अरोड़ा, रिटायर्ड असिस्टेंट मैनेजर द ट्रिब्यून

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