पंचकूला के 238 होनहार पहुंचे चंडीगढ़

Panchkula Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। दसवीं पास आउट शहर के होनहारों ने अपना रुख चंडीगढ़ के स्कूलोें की ओर कर लिया है। चार प्राइवेट स्कू लों के मुताबिक इस साल उन स्कूलों से करीब 418 विद्यार्थी दसवीं की परीक्षा में पास हुए थे। इनमें से केवल 180 विद्यार्थियों ने ही स्कूलों में दाखिला लिया है, जबकि 238 विद्यार्थियों ने ग्यारहवीं में चंडीगढ़ के स्कू लों में दाखिला ले लिया है। भवन विद्यालय स्कू ल की प्रिंसिपल शशि बनर्जी ने बताया कि दसवीं क्लास में स्कूल के 197 विद्यार्थी पास हुए थे। स्कूल में केवल 120 विद्यार्थियों ने ही स्कूल में दाखिला लिया है। बाकी के 77 विद्यार्थियों में से ज्यादातर विद्यार्थियों ने चंडीगढ़ में एडमिशन ले लिया है। वहीं ब्लू वर्ड स्कूल के अनुसार 63 विद्यार्थी दसवीं की परीक्षा में पास हुए थे जिनमें से 60 विद्यार्थियों ने ही स्कूल में एडमिशन लिया है। दून पब्लिक स्कूल और लिटिल फ्लावर स्कूल के 158 विद्यार्थी दसवीं की परीक्षा में पास हुए थे। बारहवीं स्कूल में न होने की वजह से इनमें से ज्यादातर विद्यार्थियों ने चंडीगढ़ के स्कूलों में एडमिशन लिया है।


जब तक बच्चे घर नहीं पहुंचते तब तक डर लगा रहता है
सेक्टर सात में रहने वाली वंदना के दोनों बच्चों ने इसी साल दसवीं की परीक्षा पास की है। परीक्षा पास करने के बाद दोनों बच्चों ने पंचकूला के बजाय चंडीगढ़ में एडमिशन लेना मुनासिब समझा। उनका कहना है कि यदि बच्चे यहां से ग्यारहवीं करते तो उन्हें पीयू में एडमिशन मिलना मुश्किल होता। इसलिए बच्चों का एडमिशन वहां पर कराना पड़ा। बच्चे भले ही चंडीगढ़ पहुंच गए, लेकिन उनकी चिंताएं दूर नहीं हो पा रहीं। जब तक बच्चे घर नहीं पहुंच जाते तब तक उन्हें चिंता सताती रहती। उनकी बेटी अदिति ने दसवीं में 91.2 अंक लाए थे। अदिति का भाई सिद्धार्थ भी चंडीगढ़ पढ़ने के लिए जाता है। उन्होंने कहा कि यदि यहां पर सारी सुविधाएं होती तो बच्चों को वहां पर न भेजना पड़ता।

चंडीगढ़ जाने से बढ़ गया खर्चा
लिटिल फ्लावर से दसवीं करने के बाद सेक्टर सात मेें रहने वाली अंकिता शर्मा ने भी एडमिशन चंडीगढ़ में लिया। उनकी मां पंकज ने बताया कि चंडीगढ़ में एडमिशन लेने के बाद उन्हें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। चंडीगढ़ के स्कूलों की फीस यहां के स्कूलों के मुताबिक कहीं ज्यादा है। कामर्स में केवल एडमिशन फीस 22 हजार रुपये लगी है। इसके अतिरिक्त ट्यूशन फीस अलग से है और स्कूल से घर आने जाने का किराया भी है। अंकिता ने बताया कि उनके कई दोस्तों ने भी चंडीगढ़ में एडमिशन लिया है। उनका कहना है कि यदि यूनिवर्सिटी या अन्य एजुकेशन की सुविधा होती तो विद्यार्थियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता ।


यूनिवर्सिटी होती तो परेशानी नहीं आती
सेक्टर आठ निवासी अक्षिता गर्ग ने भी एडमिशन चंडीगढ़ के स्कूल में लिया है। उन्होंने भवन विद्यालय से इसी साल दसवीं की परीक्षा पास की है। उनका कहना है कि बस से आने जाने में इतनी परेशानी आती है कि घर आकर पढ़ने का मन नहीं करता। इतनी भीड़ होती है बस में घुसना मुश्किल होता है। उन्होंने बताया कि यदि यूनिवर्सिटी या अन्य सुविधा होती तो हजारों बच्चों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

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