कार में छूट गया मासूम, दर्दनाक मौत

Panchkula Updated Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। दादा-दादी तीन नन्हे-मुन्नों के साथ अपने बेटे को खाना देेने चले गए और ढाई साल का मासूम बच्चा कार में ही रह गया। करीब एक घंटे बाद जब सभी लौटे तो पोता बेहोश मिला। आनन-फानन वह बच्चे को लेकर अस्पताल भागे, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया। पंचकूला सेक्टर-7 में शनिवार दोपहर मानवीय चूक से हुए हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार में मायूसी बिखेर दी।
सेक्टर सात की कोठी नंबर 954 में भूपेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा रिंकू कनाडा में है, जबकि छोटे तरनजीत सिंह की एमडीसी सेक्टर पांच में फैशन जोन के नाम से रेडीमेड शॉप है। रिंकू और तरनजीत के दो-दो बेटे हैं। रिंकू के बेटे भी यही रहते हैं। शनिवार दोपहर भूपेंद्र सिंह अपनी पत्नी और चारों पोतों के साथ एमडीसी सेक्टर पांच में तरनजीत को खाना देने के लिए आई-ट्वंटी कार से निकले। एक घंटा वहां रुकने के बाद करीब साढ़े तीन बजे वह खाना देकर वापस कोठी में आ गए। तीन बच्चे और दादा-दादी तो घर में चले गए, लेकिन भूलवश ढाई साल का मासूम पारस अंदर ही रह गया।
दादा-दादी कंफ्यूजन में रहे
भूपेंद्र सिंह के रिश्तेदार बलकार सिंह के मुताबिक तरनजीत का बेटा पारस कार के पीछे वाली सीट पर बैठा था। उसके साथ दूसरे भी बच्चे थे, जो कार से निकलकर कोठी में चले गए। पारस वहीं रह गया। वह नींद में था। दादी को लगा कि चाराें बच्चे कोठी में चले गए, इसलिए वह पीछे वाली सीट को बिना देखे अंदर चली गईं। दादा भूपेंद्र सिंह भी इसी सोच में रहे कि चाराें बच्चे दादी के साथ कोठी में चले गए। उन्होंने अपनी कार को लॉक किया और अंदर चले गए। कार में सेंट्रल लाकिंग सिस्टम था।
एक घंटे बाद शुरू हुई खोजबीन
संयुक्त परिवार होने के कारण पारस की मां को लगा कि उनका बेटा दूसरे बच्चों के साथ पहली मंजिल पर है, लेकिन जब उनका बड़ा बेटा मानस उनके पास आया तो उसने पारस के बारे में पूछा, तब उनका शक गहराया। पूरे घर में उसकी खोजबीन की गई। बाद में किसी की नजर कोठी के बाहर खड़ी कार में गई। झांक कर देखा तो पारस अंदर बेहोश था। तुरंत गाड़ी का लॉक खोला गया और उसे बाहर निकाला। होश नहीं आने पर उसे सेक्टर सात स्थित धवन हास्पिटल ले गए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले उसने दम तोड़ दिया था। डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मां की हालत बिगड़ी, अस्पताल में दाखिल
अपने दिल के टुकड़े की मौत की सूचना के बाद से पारस की मां सिमरनजीत कौर की हालत खराब हो गई। अपने बेटे के मौत के सदमे से वह बार-बार बेहोश हो रही थी। रात में उनकी हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें एक निजी अस्पताल में भरती कराया गया है।
चारों भाई एक साथ रहते थे
पारस अपने परिजनों के आंखों का तारा था। चारों बच्चे साथ खेलते और साथ ही रहते थे। परिजनों ने बताया कि पारस का एडमिशन सेक्टर सात स्थित प्ले वे स्कूल में कराया गया था। घर में वह खूब नटखट शैतानियां करता था। पारस के इस तरह दुखद हादसे में चले जाने से घर के अन्य बच्चे खामोश और गमगीन हैं।
कोट
अस्पताल में लाने से पहले बच्चे की मौत हो चुकी थी। बच्चे को रिवाइव करने के लिए दस डाक्टरों की टीम ने प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। प्रारंभिक जांच में लग रहा है कि बच्चे की मौत दम घुटने से हुई है।
डा. कुलदीप धवन, संचालक धवन हास्पिटल

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