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इंटरनेट के माध्यम से हो रही भ्रूण हत्या : एडीजीपी

Panchkula Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। कन्या भ्रूण हत्या में इंटरनेट की भूमिका भी सामने आ रही है। इंटरनेट के माध्यम से लोग गर्भ में पल रहे नवजात शिशु का लिंग परीक्षण करवा रहे हैं। विदेश से किट मंगवाकर जांच के लिए सैंपल भेजा जाता है और इसकी रिपोर्ट गुपचुप तरीके से ईमेल के जरिए प्राप्त की जा रही है। इंटरनेट के माध्यम से इस तरह की जांच पर जल्द ही कानून बनाए जाने पर विचार चल रहा है। यह बात बुधवार को मोगीनंद स्थित पुलिस लाइन में कन्या भ्रूण हत्या पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में एडीजीपी डा. केपी सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि पुलिस भी कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कई कदम उठा रही है।
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समारोह में हरियाणा पुलिस के डीजीपी रंजीव दलाल ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या देश पर बहुत बड़ा काला धब्बा है। इसे रोकने के लिए सभी सरकारें प्रयत्नशील हैं। हरियाणा पुलिस स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कन्या भ्रूण हत्या को रोकने का प्रयास कर रही है। कई मामलों में पुलिस को सफलता भी मिली है।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों यमुनानगर में एक महिला पुलिसकर्मी ने गर्भवती महिला बनकर कन्या भ्रूण हत्या करवाने वाले डाक्टरों का स्टिंग आपरेशन किया और उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया।
उन्होंने बताया कि विभाग ने सावन के महीने में कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। उनकी सुरक्षा के लिए हर जिले में 200 होमगार्ड नियुक्त किए गए हैं। इस अवसर पर एडीजीपी डा. केपी सिंह ने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या के लिए समाज, महिलाएं, पुलिस और डाक्टर सबसे ज्यादा गुनाहगार हैं।
उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने 1861 में आईपीसी की धारा 312-315 में कन्या भ्रूण हत्या को जघन्य अपराध माना था, लेकिन समाज के कारण कानून में कुछ ढील दे दी गई। इसी तरह पुलिस ने भी इस अपराध को इतनी गंभीरता से नहीं लिया। सिंह के अनुसार अगर कोई शराब की दो बोतल लेकर कहीं जाता है, तो पुलिसकर्मी उस पर मामला दर्ज कर देते हैं, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या की मुखबिरी में एक भी मामला दर्ज नहीं हो पाता है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में लोग इंटरनेट के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा दे रहे हैं। जल्द ही इस पर भी रोक लगाई जाएगी। स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. कमला सिंह ने बताया कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने के अभियान में महिलाएं ही सबसे पीछे रहती हैं। सिंह के अनुसार लड़कियों को स्कूल स्तर पर इसकी शिक्षा दी जानी चाहिए।
सिविल सर्जन डा. वीके बंसल ने बताया कि हरियाणा में पहले के मुकाबले लिंगानुपात में दूरी कम हुई है। कुछ गांव ऐसे हैं, जहां पर युवकों के मुकाबले युवतियों की संख्या अधिक है। इस अवसर पर एडीजीपी बीएस संधू, पुलिस कमिश्नर अंबाला केके शर्मा, पंचकूला डीसीपी पारुल कुश जैन, संस्था के प्रधान आरएस बुधराम, स्टेट प्रधान रविंद्र शर्मा, सुखविंदर सिंह, रामा संस्था के हेड वी आनंद, सुभाष पपनेजा, एसके नैयर, विजय अरोड़ा समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।

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