आवारा कुत्तों के आतंक से लोग आतंकित

Panchkula Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। हर दिन कोई न कोई शिकार इनका बन रहा है। कुत्तों का भय इतना बढ़ गया है कि बच्चों और सीनियर सिटीजन ने शाम और सुबह के वक्त घर से निकलना बंद कर दिया है। खास बात यह है कि इन पर लगाम लगाने में नगर निगम भी फेल रहा है। लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। एक तरफ जहां लोगों में आवारा कुत्तों का भय व्याप्त है, वहीं निगम के खिलाफ काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर आश्वासन दे दिया जाता है कि जल्द कुछ न कुछ करेंगे, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया जाता। हकीकत का पता यहां से चलता है कि सिविल अस्पताल में कुत्ते के काटने वाले मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है।
सिविल अस्पताल के डाक्टरों के मुताबिक कुत्तों के शिकार हर रोज चार से पांच मरीज अस्पताल में आते हैं। कभी-कभार इनकी संख्या बढ़ भी जाती है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह समस्या शहर में कितनी विकट होती जा रही है। शहर का कोई भी ऐसा सेक्टर नहीं है जहां कुत्तों का आतंक न हो। हर सेक्टर से नगर निगम में शिकायत दर्ज करवाई गई है। इतना आतंक फैलने के बावजूद नगर निगम और स्थानीय प्रशासन अब तक मौन है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो हर किसी का घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। लोगों ने जल्द से जल्द मामले में कार्रवाई की मांग उठाई है।
शहर में कुल साढ़े चार हजार आवारा कुत्ते
नगर निगम के मुताबिक शहर में साढ़े चार हजार आवारा कुत्ते हैं। इनकी यह संख्या बीते करीब दो साल पहले हुई गिनती पर आधारित है। इससे यह बात भी पुख्ता होती है कि इनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई होगी। सूत्रों के अनुसार इनकी संख्या पांच हजार से पार हो चुकी है। हालांकि नगर निगम ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इनमें से सिर्फ 1200 कुत्तों की नसबंदी हुई थी और बाकी रह गए थे। इन कुत्तों की नसबंदी का काम पिछले कई दिनों से रुका हुआ है।
क्या कर सकता है नगर निगम
शहर को आवारा कुत्तों से छुटकारा दिलाने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। नगर निगम इन कुत्तों को पकड़ कर शहर के बाहर छुड़वा सकता है, लेकिन यह कोई स्थाई हल नहीं है। दूसरे दिन ही कुत्ते शहर में आ जाते हैं। पिछले साल नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी कराने का फैसला लिया था, लेकिन बीच में ही इस काम को रोक दिया गया। इससे कुत्तों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ।
हिंसक होने का एक कारण यह भी
पेट एनिमल एसोसिएशन आफ इंडिया की ओर से पिछले साल शहर के आवारा कुत्तों पर किए गए सर्वे का नतीजा चौंकाने वाला था। इन कुत्तों में काफी हद तक आयरन की कमी पाई गई। चिकित्सकों के अनुसार आयरन कम होने का सीधा असर कुत्तों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर दिखाई देता है। कुत्ते आसानी से मामूली बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसके अलावा कुछ कुत्तों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी बढ़ जाता है। चिकित्सकों का मानना है कि गर्मी और चिड़चिडे़पन के कारण कुत्ते हिंसक हो रहे हैं।

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