पिंजौर नगर परिषद घोटाले में पूर्व उपप्रधान और पूर्व पार्षद गिरफ्तार

Panchkula Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। नगर परिषद पिंजौर में फर्जी बिल पास कर एक करोड़ रुपये के घोटाले में विजिलेंस ने दो अहम आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विजिलेंस ने शुक्रवार रात को पिंजौर में छापा मारकर नगर परिषद के पूर्व उपप्रधान अमरचंद और पूर्व पार्षद मायादेवी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मायादेवी को गिरफ्तार करने में विजिलेंस को थोड़ी मशक्कत जरूर करनी पड़ी। दोनों आरोपियों को शनिवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से मायादेवी को दो दिन के रिमांड पर और अमरचंद को न्यायिक हिरासत मेें भेज दिया गया। विजिलेंस मायादेवी की गिरफ्तारी को अहम मानकर चल रही है, क्योंकि 75 लाख के फर्जी बिलों पर मायादेवी के हस्ताक्षर हैं और उनके ही इशारे पर सारे फर्जी बिल बनाए गए थे।
जानकारी के मुताबिक नगर परिषद पिंजौर में वर्ष 2009 में एक करोड़ के फर्जी बिल बनाकर रुपयों की हेराफेरी का मामला सामने आया था। इसके बाद सरकार ने इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी थी। विजिलेंस ने मामले में जांच की और चार अलग-अलग घोटाले में 18 लोगों को संलिप्त पाया और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से चार आरोपी पहले काबू किए जा चुके हैं, जबकि एक की मृत्यु हो चुकी है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
विजिलेंस के डीएसपी निहाल सिंह और इंस्पेक्टर राजपाल के मुताबिक एक दिन पहले उन्हें दो अन्य आरोपियों के बारे में सुराग मिला। जिस पर शुक्रवार को अमरचंद को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया और उसके बाद विजिलेंस टीम मायादेवी के घर पहुंची।
विजिलेंस को पूरी सूचना थी कि मायादेवी अपने घर पर ही हैं, लेकिन उनकी बहुओं ने मना कर दिया। विजिलेंस छापे के दौरान इलाके की बिजली गुल थी। इसी बीच विजिलेंस टीम महिला पुलिस के साथ मायादेवी के घर में दाखिल हुई और छानबीन शुरू कर दी। विजिलेंस के भय से मायादेवी एक कमरे के बेड के नीचे छिप गई, लेकिन वह बच नहीं पाई। आखिरकार टीम ने दबोच लिया। इस मामले में अब तक पुलिस नगर परिषद के लिपिक हरगुलाल, ठेकेदार मोहनलाल, इंजीनियरिंग वर्क्स के प्रोपराइटर चरणजीत लाल पुरी और पूर्व पार्षद हरजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी नगर परिषद के पूर्व सचिव रमन किशोर ने सरकार और विजिलेंस को पत्र लिखकर घोटाले में अपनी भूमिका के बारे में दोबारा से जांच की मांग की है। रमन किशोर का कहना है कि घोटाले में उसकी कोई भूमिका नहीं है।

यह था फर्जी बिलों पर घोटाला
वर्ष 2009 में नगर परिषद के एक कर्मचारी ने सरकार और विजिलेंस को सूचना दी थी कि नगर परिषद में फर्जी बिलों को बनाकर लाखों रुपये का घपला हो रहा है। इस आधार पर मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी गई। विजिलेंस ने पूरे मामले की जांच की तो एक करोड़ की हेराफेरी सामने आई। जांच में चार मामले मुख्य रूप से उजागर हुए और आरोपियों के खिलाफ धारा 406, 409, 420, 466, 467, 468, 476, 120बी आईपीसी और 13 (1डी) पीसी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए।

इन मामलों पर दर्ज हुई एफआईआर
1. एनएच-22 के निर्माण के दौरान तोड़ी गई दुकानों के मलबे उठाने के झूठे बिल बनाए गए। मलबे तो उठाए नहीं गए, लेकिन नौ लाख 49 हजार के फर्जी बिल पास कर दिए गए।
2. सेप्टिक टैंक की सफाई में छह लाख 92 हजार रुपये के फर्जी बिल पास किए गए।
3. नालियों पर लोहे की जालियां बिछाने के मामले में 85 लाख रुपये के फर्जी बिल बनाए गए।
4. पिंजौर-बद्दी मार्ग पर लाइटें लगवाई गईं जिसमें लागत से अधिक तीन लाख 44 हजार के बिल बनाए गए।

इन्हें बनाया गया आरोपी
नगर परिषद के पूर्व प्रधान कुलदीप सिंह किक्का, कश्मीर लाल बंसल, अमर चंद, संजीव कुमार, रमन किशोर, जगमोहन, अविनाश कौर, लाजपत, सुमन, निर्मला शर्मा, हरगुलाल, मोहनलाल, चरणजीत लाल पुरी, हरजिंदर सिंह, मायादेवी सहित कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

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