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डाक्टरों के ठुकराने पर डीसी ने अपनी कार से भेजा गर्भवती को

Panchkula Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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पंचकूला। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए सरकार की कई योजनाएं सरकारी अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रही हैं। इसका प्रमाण सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में देखने को मिला। पिंजौर निवासी एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा को लेकर मंगलवार रात करीब दो बजे अस्पताल के गायनी वार्ड में पहुंची, लेकिन वहां से उसे वापस भेज दिया गया। महिला अगले दिन दोबारा अस्पताल पहुंची और फिर से आनाकानी शुरू हो गई। इससे परेशान महिला सीधे जिला सचिवालय पहुंची और डीसी के सामने अपनी बात रखी। इसी दौरान उसे फिर से दर्द होने लगा और डीसी आशिमा बराड़ ने अपनी कार से उसे सिविल अस्पताल पहुंचाया। महिला ने कुछ ही घंटे बाद एक बच्चे को जन्म दिया। सात माह में जन्मे बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे पीजीआई में दाखिल कराया गया है। उसके बाद डीसी ने डाक्टरों की जमकर क्लास लगाई और मामले की जांच बैठा दी है।
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पिंजौर के सूरजपुर की रहने वाली एक महिला को मंगलवार देर रात अचानक दर्द शुरू हो गया। इस पर उनके परिजन उसे सिविल अस्पताल लेकर पहुंच गए। यहां पहुंचने पर डाक्टरों ने महिला से कहा कि अभी तो केवल सात महीने हुए हैं। डिलीवरी का समय नहीं हुआ है। इस पर परिजन उसे लेकर घर चले गए। अगले दिन बुधवार सुबह महिला को दोबारा से दर्द शुरू हो गया और परिजन सिविल सर्जन डा. वीके बंसल से मिले। डा. बंसल ने उन्हें आरएमओ डा. राजकुमार के पास भेज दिया। डा. राजकुमार ने परिजनों को फर्स्ट फ्लोर पर बने गायनी वार्ड में भेज दिया। यहां पर दोबारा से गर्भवती महिला के इलाज पर आनाकानी शुरू हो गई। इसके बाद महिला ने डीसी आशिमा बराड़ से गुहार लगाई। दर्द से परेशान महिला से रहा नहीं गया तो वह डीसी रूम में रोने लगी। उसके बाद डीसी ने अपनी गाड़ी से उसे सिविल अस्पताल पहुंचाया और अस्पताल में भरती कराया।
डीसी ने इस कार्रवाई पर स्वास्थ्य अधिकारियों की भी जमकर क्लास लगाई। अस्पताल मेें दाखिल महिला ने कुछ ही घंटे बाद एक बच्चे को जन्म दिया। सूत्रों के अनुसार महिला का सात माह का गर्भ था, इसलिए बच्चे की देखभाल के लिए पीजीआई में दाखिल कराया गया। मामले के बाद डीसी ने जांच बैठा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टीम बनाकर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार गायनी वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों ने अपनी रिपोर्ट में लिख दिया है कि वह तो अपनी ड्यूटी कर रहीं थी, जबकि डाक्टर सो रही थीं।
कोट्स
मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। जांच चल रही है। दोषी स्टाफ के खिलाफ जरूर कार्रवाई की जाएगी।
डा. उषा गुप्ता पीएमओ, सिविल अस्पताल, पंचकूला
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