हुडा ने नगर निगम से मांगा हिस्सा

Panchkula Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। शहर में विकास कराने के लिए नगर निगम की पिछले पांच महीने से जारी कवायद पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) ने पानी फेर दिया है। हुडा के मुख्य प्रशासक ने पंचकूला की डिप्टी कमिश्नर-कम-नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर सभी विकास कार्यों पर 14 प्रतिशत विभागीय शुल्क जमा कराने की मांग की है। यानी यदि शहर में 18 करोड़ के विकास कार्य होते हैं तो इस राशि का 14 प्रतिशत शुल्क हुडा के पास जमा कराना होगा। यदि यह राशि नगर निगम नहीं जमा कराता है तो हुडा शहर का एक भी काम नहीं करेगा। दूसरी तरफ, जानकारों का कहना है कि नगर निगम के बायलॉज में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि वह काम कराने के एवज में किसी विभाग को कोई शुल्क जमा कराए। ऐसे में इस बात की आशंका बढ़ गई है कि शहर के विकास के लिए जो गाड़ी बढ़ी थी, वह एक बार फिर से वह थम सी गई है।
नगर निगम के पास टेक्निकल स्टाफ की कमी के कारण 27 जनवरी को निगम कमिश्नर ने हुडा के कुछ स्टाफ को अपने साथ जोड़ा था। बैठक में यह भी तय किया गया कि हुडा के एक्सईएन की निगरानी में एसडीई और जेई नगर निगम के प्रपोजल तैयार करेंगे और शहर का विकास कराने में मदद करेंगे। नगर निगम के कहने पर हुडा के अधिकारियों ने फरवरी में पूरे शहर के करीब 18 करोड़ के विकास कार्यों के प्रपोजल बनाए और उसकी स्वीकृति के लिए निकाय विभाग के दफ्तर में भेज दिया गया। काम शुरू होने वाले ही थे कि हुडा के मुख्य प्रशासक के दफ्तर से सात जून को एक पत्र जारी कर सभी कामों पर 14 प्रतिशत विभागीय शुल्क वसूलने के निर्देश दे दिए गए। हालांकि अब तक इस बारे में नगर निगम की ओर से कोई भी जवाब नहीं दिया गया है, लेकिन बायलॉज के अनुसार निगम की ओर से काम कराने के लिए कोई भी विभागीय शुल्क नहीं दिया जाता। अपने पत्र में हुडा ने यह भी कहा है कि एस्टीमेट पास होने के बाद नगर निगम को सभी एस्टीमेट के रुपये भी हुडा के पास जमा कराने होंगे।
यदि विभागीय शुल्क दिया तो काम होगा महंगा
हुडा की ओर से मांगे गए विभागीय शुल्क को यदि नगर निगम देता है तो जो काम एक करोड़ में होने वाले थे, वे अब एक करोड़ 14 लाख में होंगे। ऐसे में निगम के खजाने पर बोझ बढ़ेगा। यदि काम महंगे होंगे तो इसका सीधा सा असर जनता पर पड़ेगा। जनता से ही टैक्स वसूलकर खजाने को भरा जाएगा। जानकारों का कहना है कि इससे अच्छा है कि नगर निगम खुद अपने सारे काम करवाए।
2009 में मुफ्त में दी थी सेवा
नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविंदर रावल का कहना है कि नगर निगम में टेक्निकल स्टाफ की कमी पर साल 2009 में मुख्यमंत्री के आदेश के बाद हुडा की सिविल डिविजन व इलेक्ट्रिकल सब डिविजन को निगम के साथ अटैच कर दिया गया था। हुडा की ओर से फ्री आफ कास्ट सर्विस देने का समझौता हुआ था। यह सेवा 31 मार्च 2011 तक थी। निगम कमिश्नर को इसी आदेश को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए था।
फाइनेंशियल कमिश्नर से आज मिल सकते हैं पूर्व पार्षद
निकाय विभाग के फाइनेंशियल कमिश्नर से सोमवार को पूर्व पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल मिल सकता है। पिछले दिनों पूर्व पार्षदों की हुई एक मीटिंग में तय किया गया था कि सोमवार को फाइनेंशियल कमिश्नर से मिल कर वार्ड के एस्टीमेट उन्हें सौंप दिए जाएंगे।

2009 से ऐसे रुकता गया विकास
4 मई 2009 : ट्रिब्यूनल ने नगर परिषद के पूर्व प्रधान रविंदर रावल का चुनाव रद किया। हालांकि नवंबर 2011 में उनकी प्रधानगी पर सुप्रीमकोर्ट ने मोहर लगा दी थी।
17 मार्च 2010: सरकार ने पंचकूला को नगर निगम बनाया।
25 मार्च 2010 : नगर निगम अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती मिली।
29 अक्तूबर 2010: हाईकोर्ट ने नगर निगम की अधिसूचना रद कर दी।
10 अगस्त 2011 : सुप्रीमकोर्ट ने सरकार की एलपीए एडमिट कर हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
24 अगस्त 2011 : राज्य सरकार ने स्टे मिलने के बाद नगर निगम बहाल कर दी।
27 जनवरी 2012 : नगर निगम ने हुडा के स्टाफ को अटैच किया।
15 मई 2012 : टेक्निकल स्वीकृति नहीं मिलने पर रुक गया काम।
18 मई 2012 : मीटिंग में तय हुआ कि हुडा ही देगा तकनीकी स्वीकृति।
7 जून 2012 : हुडा ने मांग लिया विभागीय शुल्क
कोट
इस बारे में सूचना मिली है। यह तो हुडा की तरफ से सुझाव आए हैं। इस बारे में निगम कमिश्नर से विचार-विमर्श किया जाएगा।
ओपी सिहाग, ईओ नगर निगम।

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