पंचकूला में आशियाना बनाएंगे वीके सिंह!

Panchkula Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
पंचकूला। भारतीय सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने और जन्म तिथि विवाद के चलते चर्चा में रहने वाले जनरल वीके सिंह रिटायरमेंट के बाद पंचकूला में अपना आशियाना बनाएंगे। उन्होंने शहर के पॉश इलाके मनसा देवी कांप्लेक्स में प्लाट ले लिया है, जहां जल्द ही उनकी कोठी बनने की उम्मीद है।
यह खुलासा किया है जरनल वीके सिंह के साथ ही वीरवार को रिटायर होने वाले सेना की वेस्टर्न कमांड के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल एसआर घोष ने। अपने कार्यकाल के अंतिम दिन बातचीत में यहां जरनल घोष ने बताया कि भिवानी के निवासी भारतीय सेना के जांबाज जनरल वीके सिंह के अलावा उन्होंने खुद भी पंचकूला में बसने का फैसला किया है। ले. जनरल घोष का कहना है कि कुछ दिन पहले ही जनरल सिंह ने उन्हें बताया था कि वह यहीं अपने प्लाट पर मकान बनाकर बसना चाहते हैं।
सेना प्रमुख वीके सिंह के साथ रिटायर हो रहे वेस्टर्न कमांड के जीओसी इन सी एसआर घोष ने भी पंचकूला के सेक्टर नौ में कोठी ले ली है। वह शुक्रवार से ही अपनी कोठी में शिफ्ट हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि चंडीमंदिर के नजदीक होने के कारण पंचकूला उनके लिए सबसे बेहतर रहेगा। यहां की हरियाली और कम ट्रैफिक से वह काफी प्रभावित हैं। इसके अलावा उनके अधिकतर फौजी दोस्त भी पंचकूला में रहते हैं। वीके सिंह भी उनके बेहतरीन दोस्तों में शामिल हैं। दोनों ने साल 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में हिस्सा लिया था।
जनरल मलिक को भी रास आया पंचकूला
कारगिल युद्ध के दौरान सेनाध्यक्ष रहे जनरल वीपी मलिक भी रिटायरमेंट के बाद से पंचकूला के सेक्टर छह में रहते हैं। वेस्टर्न कमांड नजदीक होने के कारण पंचकूला के कई सेक्टरों में फौज के रिटायर्ड अधिकारी यहां रहना पसंद करते हैं। पंचकूला के सेक्टर 2, 4 12 और 12 ए में अधिकतर कोठियों में फौज के रिटायर्ड कर्नल, कैप्टन, लेफ्निेंट और अन्य अधिकारी रहते हैं। इसके अलावा सेक्टर 20 में फौजियों के लिए अलग से एक सोसाइटी भी बसाई गई है। सेक्टर-27 में भी आर्मी अधिकारियों के लिए एक सोसाइटी का निर्माण कार्य अभी चल रहा है।
वीके सिंह के कार्यकाल में फौज ने की तरक्की : घोष
रिटायरमेंट के दिन पत्रकारों से बातचीत के दौरान पश्चिम कमान के जीओसी ने कहा कि सेनाध्यक्ष जरनल वीके सिंह फौज के बेहतरीन लीडर रहे हैं। भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे छाए रहने के बावजूद उनके कार्यकाल के दौरान फौज ने काफी तरक्की की है। एक साल के दौरान जितने भी सफल आपरेशन हुए हैं, उनका श्रेय वीके सिंह को ही जाता है। एसआर घोष बोले, ‘जनरल सिंह एक ईमानदार और मेहतनी अधिकारी हैं।’
1971 युद्ध के अंतिम सर्विंग वेटरन
वीरवार को रिटायर होने वाले लेफ्टिनेंट जनरल घोष को 1971 में कमीशन मिला और उन्हें पाकिस्तान के साथ जंग में भाग लेने का मौका भी मिल गया। जनरल वीके सिंह के साथ लेफ्टिनेंट जनरल घोष के रिटायर होने से 1971 की जंग के अंतिम सर्विंग वेटरन से सेना का साथ छूट गया। ले. जनरल घोष को अच्छी सेवा के लिए एवीएसम और पीवीएसएम से भी नवाजा जा चुका है। वह और उनकी पत्नी बुलबुल घोष ने पश्चिमी कमान में रहते हुए सैन्यकर्मियों, उनके परिवारों और पूर्व सैनिकों की सेवा करके उनका दिल जीत लिया।

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