लेक की तरंगों के साथ गहराता गया लेक का रंग

Panchkula Bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 28 Sep 2018 01:49 AM IST
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लेक की तरंगों के साथ पेटिंग्स में दिखा जीवन का प्रवाह
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- आर्ट के युवा छात्रों के हाथों का हुनर देख सभी रह गए दंग
- कैनवास में बिखरे पेटिंग्स के खूबसूरत रंग, बेटियों को खुले आसमां उड़ने का दिया संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आकार है और न कोई नाम। साइज और न शक्ल। यह होनहार युवाओं के बस कैनवस पर बिखरे कुछ रंग हैं, जिसे आर्टिस्ट की कल्पना कहा जा सकता है। इसमें विचारों का प्रवाह है, मन की अभिव्यक्ति है, महिलाओं की आजाद ख्वाहिशें और अंधेरे रास्तों में अकेले निकल पड़ने की पूरी चाहत। अलग-अलग रंगों से सजी ये तस्वीरें वीरवार को सुखना लेक के किनारे देखने को मिलीं।
सिटी ब्यूटीफुल के आर्ट कालेज के युवा छात्रों की पेंटिंग शाम ढलते ही लेक के जल प्रवाह के साथ सभी को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही थीं। यहां रंग-बिरंगे स्टॉल में लगी पेंटिंग्स लोगों को खूब पसंद आई। इसमें रॉक गार्डन के साथ जीवन के कठिन मार्गों के साथ सुंदर जीवन जीने की कला का बेजोड़ नमूना पेश कर रही थीं।

मेरी ख्वाहिशों को उड़ने दो
पतंगों की तरह आसमान छूने का हक सिर्फ लड़कों को ही नहीं है। पेंच काटने का हुनर तो लड़कियां भी रखती हैं। इन्हें केवल अपनी बारी मिलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं। बल्कि खुद उन्हें आगे बढ़कर मांझा और पतंग थामनी होगी। पतंग की भांति महिलाओं की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए आर्ट कालेज की चित्रकार छात्रा रमनीत कहती हैं कि आसमान पर अपना हक जताने के लिए महिलाओं को खुद कोशिश करनी पड़ेगी। इस पेंटिंग के जरिए मैं महिलाओं को यह बताना चाहती हूं कि उन्हें अपने हिस्से की लड़ाई खुद लड़नी होगी।

जीवन में आगे बढ़ते रहने का संदेश
लोग शहर की खस्ताहाल सड़कों पर तो आसानी से गुजर जाते हैं, लेकिन जब जीवन का कठिन दौर आता है तो लोग पीछे हट जाते हैं। कुछ ऐसी ही पेंटिंग के माध्यम से जीवन के अनमोल पलों को संजाने में लगी आर्ट कालेज की छात्रा अंजलि गौड़ कहती हैं कि बाहर की दुनिया में बेटियां कैसे सरवाइव करेंगी। इससे आगे अब सोचने की जरूरत है।

कैनवास पर उतारा जीवन की हकीकत
आर्ट कालेज के एक हुनरमंद छात्र नाटेकू बाउलेट को जिंदगी कैनवस पर उतारना बेहद खूबसूरत अहसास की तरह लगता है। हिमाचल के रहने छात्र ने अपने प्रदेश हालातों को कैनवस पर उतारकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कैनवस पर ऑयल कलर्स की मदद से एक पेंटिंग तैयार की, जिसमें महिलाएं हाथ में लाठी लिए उजाले की ओर देख रही हैं। वहीं, एक और पेंटिंग में वे अंधेरे में आगे बढ़ने का साहस कर रही हैं और दूर उगता हुआ सुबह का सूरज उनका इंतजार कर रहा है।

मन की अभिव्यक्ति से बन जाती है तस्वीर
सिटी के एक स्कूल में फाइन आर्ट के टीचर राजेश सिवान कहते हैं कि हमारे मन में चलने वाली चीजें ऐसी ही तो होती हैं। इनका न तो कोई आकार होता है और न ही कोई रूप। अब आड़ी तिरछी रेखाएं और लाल, पीले, नीले, हरे रंगे नजर आते हैं। इसी से एक तस्वीर बन जाती है।
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