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मालिकों की बाट जोह रहे वाहन

Palwal Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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पलवल। जिले के सातों थानों में लावारिस वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। यहां लाखों के वाहन अपने मालिकों की बाट जोह रहे हैं। कारण ये है कि किसी के कागजात पूरे नहीं होते तो किसी के मालिक का ही पता नहीं है। कुछ वाहन मालिक लंबी कानूनी प्रक्रिया के चलते लेने ही नहीं आते। आलम ये है कि वाहनों की कतार बढ़ती जा रही है। देखरेख न होने से खुले में रखे ये वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।
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पुलिस की मानें तो, लावारिस वाहन के मिलने पर उसके मालिक का पता लगाने का प्रयास किया जाता है। कई बार चोरों से बरामद वाहन के मालिकों का पता मिल जाता है तो कई बार पता नहीं चल पाता। मालिक का पता चलने पर उसे पुलिस की तरफ से नोटिस जारी किया जाता है कि वे अपने वाहन को लेने के लिए कार्रवाई करें।

अधिकतर मामलों में वाहन मालिक इंश्योरेंस क्लेम ले चुके होते हैं तो वे वाहन लेने नहीं आते। कई वाहनों के नंबर चोर मिटा देते हैं, जिसके कारण वाहन के मालिक का पता नहीं चल पाता। ऐसे वाहनों के लिए छह माह के बाद नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

मार्च 2012 में हुई थी नीलामी
पलवल में मार्च 2012 में 112 वाहनों की नीलामी कराई गई थी। लेकिन उसमें से महज 82 वाहनों की ही नीलामी हो सकी।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जिले के सात थानों में 156 वाहन आज भी लावारिस खड़े हुए हैं, लेकिन नीलामी का समय आने से पूर्व वे कबाड़ में तब्दील हो जाते हैं। इसके चलते उनकी कोई अच्छी कीमत भी नहीं देता। केवल कबाड़ वाले ही इन वाहनों को औने-पौने दामों पर ले जाते हैं।
जिले के शहर, सदर, कैंप, चांदहट, होडल, हथीन और हसनपुर थानों में लावारिस वाहनों के आने का सिलसिला जारी है।

जगत सिंह हुड्डा, पुलिस अधीक्षक
- जिले के सभी सात थानों में लावारिस वाहनों की संख्या काफी है। लावारिस वाहनों की नीलामी के लिए अदालत से अनुमति लेकर जिला उपायुक्त एक कमेटी का गठन करते हैं और उसके बाद वह कमेटी इन वाहनों की नीलामी करती है। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता हैं। इससे भी वाहन यहां खड़े रह जाते हैं।

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