दो विभागों में फंसी जल आपूर्ति योजना

Palwal Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
सोहना। प्रदेश सरकार की पांच वर्ष पुरानी योजना दो विभागों के बीच अटकी हुई है। इससे सोहना शहर समेत रोजकामेव औद्योगिक क्षेत्र व कई गांवों की पेयजल सप्लाई का काम लटका हुआ है। जन स्वास्थ्य व वन विभाग इसके लिए एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2007 में सोहना में पीने के पानी की किल्लत को खत्म करने के लिए 65 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत बुढेड़ा गांव के पास गुड़गांव कैनाल से पानी लाना था। इसका फिल्टर कर सोहना शहर, रोजकामेव औद्योगिक क्षेत्र व सोहना के गांव घामड़ौज, अलीपुर, धुनेला, बेरका, सोहना ढाणी आदि को पीने का पानी सप्लाई किया जाना था। लेकिन बुढेड़ा-गुड़गांव कैनाल से सोहना तक पानी लाने के लिए बिछाई जाने वाली पाइप लाइन का कार्य अधर में लटका हुआ है। इसके लिए दोनों विभाग एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पाइप लाइन बिछाने पर 21 करोड़ रुपये खर्च होगा। वन विभाग के पाइप लाइन बिछाने के लिए मंजूरी देने के बाद यह राशि खर्च की जाएगी, पर इसके लिए अनुमति नहीं मिल रही है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 5 वर्षों में करीब 20 बार वन विभाग से लिखित मंजूरी मांगी जा चुकी है। जन स्वास्थ्य विभाग के ईएक्सईएन आरके गर्ग का कहना है कि वन विभाग पाइप लाइन बिछाने की मंजूरी देने की बजाए हर बार कोई न कोई बहाना लगाकर कागजात वापस कर देता है। उनका महकमा वन विभाग को जमीन के बदले साढ़े पांच एकड़ जमीन भी दे चुका है। दूसरी तरफ वन विभाग के डीएफओ रंजीता दहिया का कहना है कि इस योजना की मंजूरी केंद्र से मिलनी है। जन स्वास्थ्य विभाग की मांग केंद्र सरकार के पास भेज दी गई है।

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