आगरा नहरी सूखी, किसान परेशान

Palwal Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
पलवल। सिंचाई के लिए किसानों की लाइफ लाइन समझी जाने वाली आगरा कैनाल से इन दिनों पलवल व मेवात जिले के किसानों को नाम मात्र ही पानी मिल पा रहा है। इसके चलते दोनों जिलों के किसानों की हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचाई से वंचित है। पूर्व में आगरा कैनाल से किसानों को सिंचाई के लिए आठ सौ क्यूसेक पानी मिलता था लेकिन इन दिनों मात्र दो सौ क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है। इससे दोनों जिलों के किसानों के सामने भूमि सिंचाई का संकट पैदा हो गया है।
पलवल जिले से गुजरने वाली आगरा कैनाल (यूपी) में 42 सौ क्यूसेक पानी की क्षमता है, लेकिन इसमें करीब 2500 क्यूसेक पानी चलता है। इसमें से पलवल व मेवात जिले को आठ सौ क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन यूपी सरकार यमुना से कम पानी आने की बात कहकर दोनों जिलों के लिए केवल दो सौ क्यूसेक पानी ही दे रही है। जबकि दोनों जिलों की भूमि की सिंचाई के लिए इससे (आगरा कैनाल) 40 के करीब नहर, रजवाहे व माइनर निकलती है। पानी का वितरण घटने से दोनों जिलों के किसानों के सामने भूमि सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। इसके चलते अब आगरा कैनाल से निकलने वाले रजवाहों, माइनरों व नहरों से दोनों जिलों की भूमि सिंचाई से वंचित है। क्योंकि यह पानी टेल (अंतिम छोर) तक नहीं पहुंच पाता। किसानों का कहना है कि जब पूरी मात्रा में सिंचाई के लिए नहरी पानी उपलब्ध होता था तो क्षेत्र के किसान गन्ने, चना, मटर, मंसूर, गेहूं, जौ, मक्का, ज्वार, बाजरा व सब्जियों की फसलें बोते थे। लेकिन नहरी पानी उपलब्ध न होने के कारण अब दोनों जिलों के किसान केवल गेहूं की फसल ही उगा पाते हैं और इस बार गेहूं की सिंचाई के लिए भी नहरी पानी नहीं मिल पा रहा है।

क्या कहते है किसान
किसान जगबीर, कमलेश कुमार, सतबीर, जगजीवन, बिसंबर, राजेंद्र जाखड़, रामबीर सिंह, हाकिम, जकरिया व शमसुद्दीन आदि का कहना है कि आगरा कैनाल से निकलने वाले ज्यादातर रजवाहों, माइनरों व नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचने के कारण उन्हें जमीनी खारे पानी से अपने खेतों की सिंचाई करना पड़ता है। इससे फसल भी अच्छी नहीं हो पा रही है।

इन गांवों की भूमि पर होती है आगरा कैनाल से सिंचाई
जनौली, बढ़राम, अलावलपुर, किठवाड़ी, छज्जूनगर, सौंध, भिडूकी, दुर्गापुर, रतीपुर, अलावलपुर, भंगूरी, प्रहलादपुर, रसूलपुर, नंदावाला, अमरौली, कुराली, बघौला, मीरापुर, मानपुर, बिछौर, हथीन, डाडका, सैलोटी, गुदराना, सीहा, गौड़ोता, विजयगढ व नांगल जाट आदि।

कोट
राजेंद्र वोडवाल, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
- उत्तर-प्रदेश सिंचाई विभाग से दोनों जिलों की सिंचाई के लिए किसानों को आठ सौ क्यूसेक पानी मिलता था, लेकिन अब केवल दो सौ क्यूसेक पानी ही बमुश्किल मिल पा रहा है। इसके चलते टेल तक पानी पहुंचाना परेशानी की बात है।

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