हर महीने तीस नवजात की मौत

Palwal Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
पलवल। जिले में शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए कई सरकारी योजनाएं चल रही हैं। इसके बावजूद अगस्त माह में करीब एक दर्जन नवजात की मौत हुई है। आंकडे़ बताते हैं कि जिले में प्रत्येक माह औसतन 25 से 30 शिशुओं की मौत हो रही है। गांवों के चौकीदारों के रजिस्टर व निजी अस्पतालों से मिले आंकड़े यही असलियत बयां कर रहे हैं।
निजी अस्पतालों में स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण व मेवात क्षेत्र में इस तरह के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। अप्रशिक्षित दाईयों की मदद से प्रसूति कराने से नवजात की मौतें हो रही हैं। इसके कारण शिशु संक्रमण का शिकार हो जाते हैं और जब जब शिशु की हालत अधिक खराब हो जाती है तब उसे निजी अस्पताल लाया जाता हैं, फिर उसे बचाना असंभव हो जाता है।
पलवल के हथीन उपमंडल और खादर के गांवों में जच्चा और बच्चा में संक्रमण के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में डिलवरी हट योजना संसाधनों के अभाव में यह योजना फ्लाप हो चुकी है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर संसाधनों व महिला कर्मचारियों का अभाव बना रहता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी रामेंद्र सिंह का कहना है कि शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए शिशु घर खोले जा रहे हैं, जिनमें नर्सों को ट्रेनिंग देकर तैयार कर भेजा जाता हैं।

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