मकानों के बीच गुम हो गई कोस मीनार

Palwal Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
होडल बाजार में बनी मीनार तक नहीं पहुंच पाते लोग
होडल। मुगल कालीन कोस मीनारों की हालत दिन-प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। मुख्य बाजार में स्थित कोस मीनार को देखने के लिए आस-पास बने मकानों के मालिकाेंसे इजाजत लेकर पहुंचना पडे़गा। इसके आसपास जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है और यहां तक पहुंचने के लिए एक इंच का भी रास्ता नहीं छोड़ा है। इसके कारण मकानों के बीच कोस मीनार गुम हो गई है।
इतिहास बताता है कि , शेरशाह शूरी ने सन् 1540 से 45 के बीच इन मीनारों का चौकी के रूप में निर्माण किया गया था। डाक चौकी के पास कई मीनारों पर सराय का निर्माण कराया गया, लेकिन यहां बनी सराय का भी अवैध कब्जाधारियों ने नामोनिशान तक मिटा दिया है।
सम्राट अकबर ने किया था विकास
मुगल सम्राट अकबर ने डाक प्रणाली के महत्व को समझते हुए इसका विकास किया और डाक चौकी को कोस मीनार का रूप दे दिया। यहां से संदेश आगे पहुंचाए जाते थे, वहीं, इनका पहचान चिह्न के रूप में इस्तेमाल होता था। अबुल फजल ने इनके बारे में बताया है कि ये कोस मीनारें भूले भटके मुसाफिरों को रास्ता दिखाने का कार्य करती थीं और कई बार विश्राम स्थल का रूप में इस्तेमाल होता था। यहां एक चौकीदार नियुक्त होता था जो एक मीनार से दूसरी मीनार तक ऊंट पर सवार होकर से डाक पहुंचाने का काम करता था।
हरियाणा और पंजाब में बनी कोस मीनारें जहांगीर के कालखंड की हैं। तुजुक-ए-जहांगीरी के अनुसार बादशाह ने 1619 में मुल्तान के फौजदार बकीरखान को हर कोस पर एक मीनार बनाने के आदेश दिए थे। उस समय एक कोस पांच हजार गज या वर्तमान में 4.57 किलोमीटर या फिर दो मील के बराबर दूरी मानी जाती है।
कारीगरी का नमूना है मीनार
इस मीनार का ऊपरी भाग गोलाकार और नीचे का आधा भाग अष्टभुजी है। यह मीनार वर्गाकार चबूतरे पर निर्मित है। यह पूरी मीनार पुराने समय में प्रयोग किए जाने वाली छोटी ईंटों से निर्मित है इसमें चूने व सुर्खी से प्लास्टर किया गया है। आज हालत यह है कि अवैध कब्जे के कारण इनकी पहचान खत्म हो रही है। जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्राचीन धरोहर खत्म हो सकती है।

कोस मीनार के पास अवैध कब्जा के मामले में वे कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि यह मामला पुरातत्व विभाग से संबंधित है। इसकी रिपोर्ट विभागीय कार्यालय में भेज दी गई है।
विजय दहिया, जिला उपायुक्त

उपायुक्त के मारफत उनके पास रिपोर्ट आई हुई है। रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए जल्द ही मौका-मुआयना कर कोस मीनार का रास्ता निकाला जाएगा और अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।
फतेह सिंह डागर, (निदेशक, पुरातत्व विभाग)

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