इतिहास बदला, नहीं बदले स्टेशन के हालात

Palwal Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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पलवल। कभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भारत में पहली गिरफ्तारी का गवाह रहा पलवल का ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इसका खामियाजा यहां से आवाजाही करने वाले 30 हजार यात्रियों को उठाना पड़ता है। हालांकि रेलवे को इस स्टेशन से प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये की आय होती है। इसके बावजूद इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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आजादी से पहले भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पहली बार गिरफ्तारी 10 अप्रैल 1919 को पलवल के स्टेशन पर हुई थी। इतिहास में इस घटना को दर्ज हुए तकरीबन एक सदी हो गई, लेकिन स्टेशन की दशा में कोई खास फर्क नहीं हुआ। इस स्टेशन से प्रतिदिन तकरीबन 30 हजार लोग बल्लभगढ़, फरीदाबाद, ओखला, तुगलकाबाद, हजरत निजामुद्दीन, तिलक ब्रिज, नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, दयाबस्ती, शकूरबस्ती, गाजियाबाद, मेरठ, देहरादून, अंबाला, सोनीपत, कुरूक्षेत्र, रोहतक, अमृतसर, लुधियाना, गंगानगर, मुंबई, फिरोजपुर, भोपाल, कानपुर, झांसी, इटारसी, भरतपुर के लिए आते जाते हैं। स्टेशन पर चार टिकट काउंटर हैं जिनमें दो हमेशा बंद रहते हैं। यहां वेटिंग रूम है लेकिन इसकी भी हालत स्टेशन से जुदा नहीं है दीवारों पर प्लास्टर उखड़ा हुआ है, वहीं खुला स्थान होने के कारण किसी भी मौसम में यहां बैठकर ट्रेन की प्रतीक्षा नहीं कर सकते।
स्टेशन पर गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहे विवेक सिंह, बसंत कुमार, विपिन बंसल, राजेश पांचाल, राकेश कुमार व सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि इतिहास में इतना महत्वपूर्ण स्थान होने के बावजूद रेलवे विभाग का रवैया इसके प्रति काफी लापरवाही से भरा है। यह किसी पिछड़े इलाके के स्टेशन से भी बदतर है। यहां पर सुविधाएं तो हैं नही लेकिन समस्याओं की भरमार है।
इस बारे में स्टेशन मास्टर के बी मीणा का कहना है कि उन्होंने यहां पर यात्रियों को होने वाली परेशानियों के लिए विभाग को पत्र लिखा है। जल्द ही समस्याओं का निपटारा कर लिया जाएगा।
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