उप मुख्यमंत्री चौटाला के काफिले को भाकियू ने दिखाए काले झंडे

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 29 Oct 2020 12:05 AM IST
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कुरुक्षेत्र। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के काफिले को काले झंडे दिखाते हैं भारती किसान यूनिय?
कुरुक्षेत्र। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के काफिले को काले झंडे दिखाते हैं भारती किसान यूनिय? - फोटो : Kurukshetra

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उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को भारतीय किसान यूनियन चढू़नी ग्रुप की ओर से अंबाला हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर काले झंडे दिखाए गए। इस दौरान किसानों मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के खिलाफ नारेबाजी कर रोष भी प्रकट किया। प्रदर्शन की अगुवाई गुरनाम सिंह चम्मू कला द्वारा की गई और इसमें विशेष रूप से भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस व जसबीर मामू माजरा सहित काफी संख्या में किसान शामिल रहे।
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उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला कस्बे के निकट अंबाला हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक निजी पेट्रोल पंप के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए आए हुए थे। हालांकि दुष्यंत चौटाला का यह प्रोग्राम बिलकुल ही गोपनीय रखा गया था। उसके बावजूद भी किसानों को उसकी भनक लग गई और वे दोपहर के आसपास से ही कस्बे में जमा होने लगे, जैसे ही दुष्यंत चौटाला का काफिला यहां से गुजरा उन्होंने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान डीएसपी गुरमेल सिंह और एसएचओ इस्माईलाबाद सतीश कुमार के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा और पुलिस की सूझबूझ और सयम के कारण कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। दुष्यंत चौटाला के यहां से गुजरने के बाद पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली। जब किसानों से कहा गया कि दुष्यंत चौटाला का यह निजी दौरा है न कि सरकारी कार्यक्रम तो किसानों ने जवाब दिया कि भले ही ये उनका यह निजी दौरा है, लेकिन वे प्रदेश में उप मुख्यमंत्री के तौर पर विराजमान है।
इसके अलावा किसानों से जुड़ा हुआ धान खरीद का विभाग भी उन्ही के पास है। प्रेस प्रवक्ता राकेश बैस में जसवीर माजरा शाहाबाद में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी के घर के बाहर जलाए गए पुतले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह किसानों का पहले से ही प्रायोजित कार्यक्रम था। ना कि किसी व्यक्ति विशेष या किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कृष्ण बेदी सरकार में पूर्व पांच साल मंत्री रहे हैं कभी भी उनके खिलाफ निजी विरोध नही किया। न ही उनकी किसी प्रकार की कोई निजी दुश्मनी नहीं है। वह उनके हकों के लिए केवल मात्र सरकार के से लड़ रहे हैं और लड़ते रहेंगे। उन्होंने बताया कि किसान की कोई जाति नहीं है और प्रत्येक जाति का किसान है।

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